नई दिल्ली। भारत की राजधानी दिल्ली सितंबर में वैश्विक कूटनीति के साथ-साथ निवेश और कारोबार का भी बड़ा केंद्र बनने जा रही है। 18वें BRICS Summit के दौरान दुनिया के कई बड़े निवेशक, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गज राजधानी में जुटेंगे। इस दौरान 500 से ज्यादा टॉप इन्वेस्टर्स की मौजूदगी प्रस्तावित है। यह बैठक iBRICS 2026 के तहत आयोजित की जाएगी, जिसमें दुनिया के बड़े संस्थागत निवेशकों, सॉवरेन वेल्थ फंड, पेंशन फंड, फैमिली ऑफिस और कारोबारी समूहों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन निवेशकों के पास सामूहिक रूप से करीब 1 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी होने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह आयोजन भारत के लिए वैश्विक निवेश आकर्षित करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
किन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस?
बैठक में भारत समेत BRICS देशों में निवेश के नए अवसरों पर चर्चा होगी। खास तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, महत्वपूर्ण खनिज और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहेगा। निवेशकों को भारत में चल रही और प्रस्तावित बड़ी परियोजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। इसके अलावा सीमा-पार निवेश को आसान बनाने, डिजिटल भुगतान व्यवस्था और अलग-अलग देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत के लिए क्यों खास है यह बैठक?
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें BRICS Summit की मेजबानी भी नई दिल्ली में होगी। ऐसे समय में दुनिया के बड़े निवेशकों का एक मंच पर आना भारत की आर्थिक ताकत और निवेश क्षमता को दिखाने का महत्वपूर्ण मौका है। सरकार की प्राथमिकताओं में नवाचार, डिजिटल सहयोग, स्टार्टअप, टिकाऊ विकास और मजबूत वैश्विक सप्लाई चेन जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में BRICS Summit के साथ होने वाली निवेशकों की यह बैठक भारत में विदेशी पूंजी और नई कारोबारी साझेदारियों के लिए नए रास्ते खोल सकती है।
कुल मिलाकर, सितंबर में दिल्ली में होने वाला यह आयोजन सिर्फ नेताओं और वित्त मंत्रियों की बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के बड़े निवेशकों और उद्योगपतियों की मौजूदगी इसे ग्लोबल बिजनेस और इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी बेहद अहम बना सकती है।