नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ से ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदल दिया है। खरगे ने यह टिप्पणी 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बीच की। वहीं, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने खरगे के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस को उसके आपातकाल के दौर की याद दिलाई।

खरगे ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में दावा किया कि सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने वाले युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं और कंटेंट क्रिएटर्स को हिरासत में लिया जा रहा है।

खरगे ने लिखा कि हिरासत, गिरफ्तारी, जेल, लाठियां और पैलेट लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से नहीं रोक सकते। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवाओं ने देश की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी संयुक्त विपक्ष के साथ मिलकर लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। 

दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर क्या है विवाद?

यह पूरा मामला दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता पंजीकरण से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था।

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और प्रक्रियागत कारणों का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। 10 अक्टूबर को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। विपक्ष ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बताई गईं। 

किशन रेड्डी ने कांग्रेस को घेरा

खरगे के बयान पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता जी. किशन रेड्डी ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करने में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

किशन रेड्डी ने 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान विपक्षी नेताओं और पत्रकारों को जेल में डाला गया था तथा मीडिया पर प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। 

इस तरह दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। जहां कांग्रेस हिरासत की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आपातकाल के इतिहास को सामने रखकर उसके आरोपों का जवाब दिया है।