नई दिल्ली: भारत की औद्योगिक यात्रा में ‘Make in India’ पहल को शुरू हुए 12 साल पूरे हो गए हैं। 25 सितंबर 2014 को शुरू की गई इस पहल की 12वीं वर्षगांठ पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आए बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल अपने घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए निर्माण करने से आगे बढ़कर दुनिया के लिए निर्माण करने की दिशा में बढ़ रहा है।

2014 में शुरू हुई थी Make in India की पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को Make in India अभियान की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य भारत को एक बड़े वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना, निवेश आकर्षित करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और भारतीय कंपनियों को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ना था। शुरुआत में इस पहल के तहत 25 प्रमुख क्षेत्रों को फोकस में रखा गया था। इनमें ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र शामिल थे।

‘अब भारत सिर्फ अपने लिए नहीं, दुनिया के लिए बना रहा’

12 साल पूरे होने पर गोयल ने भारत की बदलती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को रेखांकित किया। उनके बयान का मुख्य फोकस इस बदलाव पर रहा कि भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के तौर पर देखने के बजाय अब वैश्विक उत्पादन और सप्लाई चेन के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

हाल के वर्षों में सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं। इनमें Production Linked Incentive यानी PLI योजनाएं भी शामिल हैं। 2020 के बाद अलग-अलग क्षेत्रों में लागू की गई इन योजनाओं का मकसद कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

FDI में भी बढ़ोतरी का दावा

Make in India के 12 साल पूरे होने के मौके पर विदेशी निवेश को भी प्रमुख उपलब्धि के तौर पर सामने रखा गया है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2024 के बीच भारत में करीब 667 अरब डॉलर का FDI आया था। वहीं 2025 में सरकार ने बताया था कि FY 2024-25 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट करीब 437.42 अरब डॉलर रहा।

2026 की वर्षगांठ पर सामने आए आंकड़ों में FY 2025-26 के दौरान भारत में 94.53 अरब डॉलर का FDI आने का उल्लेख किया गया है। वहीं 2014-15 से 2025-26 के बीच कुल FDI 843 अरब डॉलर से अधिक बताया गया है।

PLI से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ऑटो सेक्टर को बढ़ावा

सरकार के मुताबिक PLI योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस, IT हार्डवेयर और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा दिया है।

31 मार्च 2026 तक PLI योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश, करीब 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री तथा 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज होने की बात कही गई है। इन योजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 14.6 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होने का भी दावा किया गया है।

वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर

Make in India के अगले चरण में केवल देश के भीतर उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है। सरकार का जोर भारतीय कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने पर भी है। सितंबर 2026 में गोयल ने ग्लोबल ऑटो कंपनियों से भारत को दुनिया के बाजारों के लिए उत्पादन के आधार के तौर पर इस्तेमाल करने का आग्रह भी किया था।

इस तरह 12 साल बाद Make in India का फोकस घरेलू उत्पादन से आगे बढ़कर निर्यात, वैश्विक बाजार और वैल्यू चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने पर दिखाई दे रहा है। सरकार इसे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से भी जोड़ रही है।

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