UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है, उन्होंने कहा कि MDR से जुड़ी नई व्यवस्था का सीधा बोझ आम UPI यूजर्स पर नहीं पड़ेगा। ग्राहक पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे।

वित्त मंत्री ने एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि MDR को लेकर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि MDR कोई टैक्स या सेस नहीं है और इससे प्राप्त राशि केंद्र सरकार के खाते में नहीं जाएगी। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, ऐप और अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच लागू होने वाला शुल्क है।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर MDR नहीं

नई व्यवस्था के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं लगाया जाएगा। वहीं ₹2,000 से अधिक के Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस शुल्क का भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा, यानी किसी दुकान, कारोबारी या अन्य मर्चेंट को UPI के जरिए भुगतान करने पर ग्राहक से MDR के नाम पर अलग से रकम नहीं ली जाएगी। यह शुल्क पेमेंट सिस्टम में शामिल बैंकों और डिजिटल पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच तय व्यवस्था के तहत वितरित होगा।

96 फीसदी P2M ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा असर

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर को MDR से संबंधित नया फ्रेमवर्क जारी किया था। सरकार के अनुसार, इस बदलाव का असर करीब 96 फीसदी P2M ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा।

इसका मतलब है कि UPI के जरिए होने वाले अधिकांश मर्चेंट पेमेंट पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जारी रहेंगे। सरकार का कहना है कि MDR की व्यवस्था का उद्देश्य पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल संस्थाओं के बीच शुल्क का निर्धारण करना है, न कि ग्राहकों पर नया चार्ज लगाना।

MDR को लेकर विपक्ष के आरोपों पर वित्त मंत्री का जवाब

UPI MDR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी निर्मला सीतारमण ने प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा कि संसद सत्र के दौरान भी सरकार की ओर से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की गई थी। इसके बावजूद MDR को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है।

वित्त मंत्री ने लोगों से किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की जांच करने की अपील की, उन्होंने कहा कि गलत जानकारी के आधार पर होने वाली बहस से आम लोगों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है।

राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम का भी किया जिक्र

इंटरव्यू के दौरान वित्त मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम के दौरान कथित नकल और मजाक को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई।

सीतारमण ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों के संदर्भ में सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यवहार की भी अपनी मर्यादा होनी चाहिए।

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टैक्स सुधारों को लेकर वित्त मंत्री ने क्या कहा?

बेंगलुरु में आयोजित 8वें इंटरनेशनल टैक्स कॉन्फ्रेंस में निर्मला सीतारमण ने टैक्स सुधारों को लेकर भी सरकार की प्राथमिकताओं पर बात की थी, उन्होंने कहा कि कर सुधारों का लक्ष्य किसी एक उद्योग या सेक्टर को लाभ पहुंचाने तक सीमित नहीं होना चाहिए।

उनके मुताबिक ऐसी टैक्स व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है जो निष्पक्ष होने के साथ-साथ लोगों का भरोसा भी कायम रखे। इससे देश में निवेश और नई तकनीकों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

वित्त मंत्री ने टैक्स से जुड़े विषयों पर स्वतंत्र और तथ्य आधारित रिसर्च को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने टैक्स विशेषज्ञों से अपील की कि वे अपने शोध और कार्य में व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखें।