SIR को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि इसके सभी प्रमुख फैसलों को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी। ECI ने कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र को भी नीति से जुड़ा नहीं बताया। दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है।

ECI के मुताबिक 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR शुरू करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/UTs के लिए 14 मई 2026 को कार्यक्रम जारी किया गया। आयोग ने कहा कि इन फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति की रिपोर्ट के बाद आया बयान

ECI की यह सफाई उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी।इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार कुछ फैसलों को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद ECI ने कहा था कि किसी अधिकारी या आयुक्त की चर्चा, राय या सुझाव को अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता और आयोग के आधिकारिक फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

कैबिनेट सचिव को लिखी चिट्ठी पर भी सफाई

चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजी गई एक चिट्ठी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि यह पत्र किसी चुनावी नीति या IT से जुड़े फैसले के बारे में नहीं था।ECI के मुताबिक चिट्ठी आयोग में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित थी। आयोग ने कहा कि उस अधिकारी की ओर से जारी किए गए काम के बंटवारे से जुड़े आदेशों को दो चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद लागू नहीं किया गया और IT डिवीजन की निगरानी भी वापस नहीं ली गई थी।

20 राज्यों और UTs में पूरा हो चुका SIR

आयोग ने बताया कि SIR की प्रक्रिया अब तक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है, जिसमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं।ECI ने कहा कि बाकी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही कुल मतदाताओं की अंतिम संख्या सामने आएगी। जिन लोगों का नाम SIR के दौरान छूट गया है, वे लगातार चलने वाली मतदाता सूची अपडेट प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

नोटिस पाने वालों के घर पहुंचेंगे BLO

SIR के दौरान जिन मतदाताओं को नाम मैप न होने या दूसरी तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस मिले हैं, उनके लिए भी आयोग ने नई व्यवस्था की है।ECI ने कहा कि Booth Level Officers (BLOs) ऐसे मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाने में मदद करेंगे। कुछ विशेष परिस्थितियों में Electoral Registration Officer की अनुमति से सुनवाई ऑनलाइन भी हो सकती है।किसी मतदाता की जगह उसका कोई वयस्क परिवार सदस्य भी अधिकृत किए जाने पर सुनवाई में शामिल हो सकेगा।

गरीब और बेघर लोगों के लिए विशेष कैंप

आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को जरूरतमंद मतदाताओं की मदद के लिए पर्याप्त हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाने का निर्देश दिया है।इन कैंपों में रात में आश्रय लेने वाले लोगों, मजदूरों, गरीब और बेघर लोगों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, ताकि पात्र मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

ECINet सिस्टम की होगी समीक्षा

चुनाव आयोग ने अपने ECINet सिस्टम की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का भी फैसला किया है। आयोग के मुताबिक समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त करेंगे और इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।समिति यह देखेगी कि ECINet सिस्टम चुनाव संबंधी कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।

दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा

ECI ने दिल्ली में SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। इन दावों और नोटिसों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर तक कर दी गई है।महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर और उनके निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।गोवा में छूटे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए BLOs को घर-घर जाकर फॉर्म लेने का निर्देश दिया गया है। आयोग के अनुसार 97 में से 81 मतदाताओं ने अब तक Form 6 भर दिया है।