Delhi News: नोएडा से महज 20 मिनट में दिल्ली के एम्स अस्पताल पहुंचना आज से बेहद आसान हो जाएगा। दिल्लीवासियों और एनसीआर के लोगों को आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बड़ी सौगात देने वाले हैं। 10 साल जिसका इंतजार बेसब्री से किया जा रहा था आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उस बारापुला एलिवेटेड रोड फेज-3 और मुकरबा चौक अंडरपास का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही मोदी मिल-सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर और लोनी अंडरपास के निर्माण कार्य का शिलान्यास भी करेंगे। इस प्रोजेक्ट के जरिए पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी सिग्नल-फ्री तो होगी ही इसके साथ ही ट्रैफिक जाम में कमी देखी जाएगी।
प्रवेश वर्मा ने किया X पर पोस्ट
दिल्ली के लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा ने सोमवार को इस प्रोजेक्ट के शुरु होने की जानकारी दी थी, जिसमें उन्होंने बताया कि पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच का सफर आसान तो होगा ही इसके साथ ही ट्रैफिक का दबाब भी कम होगा। वहीं नोएडा से दिल्ली पहुंचने वाले लोगों के लिए इस एलिवेटेज कॉरिडोर के जरिए आवागमन करना बेहद आसान होगा।
प्रवेश वर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर बारापूला फेज 3 से कनेक्टिविटी को लेकर एक पोस्ट साझा की है। मयूर विहार फेज-1 से एम्स की कनेक्टिविटी पूरी तरह सिग्नल-फ्री होने से ट्रैफिक से जुड़ी अन्य गतिविधियों में आसानी मिलेगी।
गाजियाबाद, नोएडा और मयूर विहार के लोगों को मिलेगी राहत
बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए गाजियाबाद, नोएडा और मयूर विहार के लोगों को दक्षिणी दिल्ली आवागमन करने में काफी राहत मिलने वाली है। जहां पहले 60 मिनट में सफर पूरा होता था तो अब वहीं सफर महज 20 मिनट में पूरा हो जाएगा। ऐसे में जहां ट्रैफिक पर दबाब कम पड़ेगा तो वहीं इसके माध्यम से अब दिल्ली में आने जाने लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इस परियोजना के जरिए विकसित दिल्ली के सफर को नए पंख मिलने की राह में एक बड़ा कदम है।
निर्माण कार्य साल 2015 में हुआ था शुरु
आज अमित शाह इस बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन कर दिल्लीवासियों को बड़ी सौगात देने वाले हैं। इसके लिए दिल्ली के लोगों ने 10 साल का लंबा इंतजार किया था। साल 2014 में इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की योजना पटल पर तैयार की गई थी। इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य साल 2015 में शुरु किया गया था।
इसे तैयार करने का लक्ष्य साल 2017 का था। लेकिन कई चुनौतियों, भौगोलिक स्थिति और रफ्तार के साथ-साथ प्रशासनिक अड़चनों की वजह से इसे समय से पूरा नहीं किया जा सका था। लेकिन सरकार ने ट्रैफिक की समस्या के मद्देनजर इसे पूरा करने के लिए काम की गति में तेजी की।
जानिए कितनी है इसकी लागत
इस प्रोजेक्ट में लगने वाली लागत में कई बार संशोधन भी किया गया। जिसके बाद इसकी लागत 1,635 करोड़ रूपये रखी गई। तकरीबन 3.5 कि.मी लंबे इस प्रोजेक्ट से जुड़े सराय काले खान के पास बारापूला फ्लाईओवर को मिलाया गया है। जिससे तकरीबन 9 कि.मी का रास्ता सीधा और सिग्नल-फ्री बनाया गया है।
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