CJP Leaders Released: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने आए अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने रिहा करने का आदेश दिया।

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन नेताओं को रविवार को रिहा करने का आदेश दिया गया। रिहा होने वालों में अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं। हालांकि, उनकी रिहाई के साथ एक शर्त भी रखी गई है। नेताओं को अगले एक साल तक शांति और कानून-व्यवस्था भंग करने वाली किसी गतिविधि में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है। तीनों नेताओं को दक्षिण-पश्चिम जिले के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। उनके वकील के मुताबिक, मजिस्ट्रेट ने शांति बनाए रखने की शर्त पर उनकी रिहाई का आदेश दिया।

विमान से उतरते ही पुलिस ने लिया था हिरासत में

CJP के तीनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में विमान के उतरने के बाद ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। इसके बाद तीनों को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में बैठे विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की थी। इन धाराओं के तहत की गई कार्रवाई का उद्देश्य संभावित शांति भंग करने की आशंका को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया।

रिहाई के साथ एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त

कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने तीनों नेताओं को रिहा करने का आदेश देते हुए अगले एक साल तक शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शर्त लगाई। उनके वकील के अनुसार, नेताओं को ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है, जिससे शांति भंग होने की आशंका हो। CJP के कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तीनों नेताओं की रिहाई की जानकारी दी। उन्होंने रिहाई के साथ लगाई गई शर्त का भी जिक्र किया।

BNSS की धारा 126 और 170 के तहत क्या है प्रावधान?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने को कह सकता है, जिससे शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो। यह प्रक्रिया कानूनी शर्तों के अधीन होती है और शांति बनाए रखने की अवधि एक साल तक हो सकती है। वहीं, धारा 170 पुलिस को कुछ परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध की योजना को रोकने के लिए बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार देती है। इसके लिए पुलिस के पास संबंधित अपराध की योजना से जुड़ी जानकारी और उसे रोकने की जरूरत के आधार होने चाहिए। इस प्रावधान के तहत हिरासत पर कानूनी समय-सीमा भी लागू होती है।

CJP के प्रदर्शन से पहले हुई थी कार्रवाई

तीनों नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हुई। CJP और कुछ छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। रिहाई के आदेश के बाद अब तीनों नेता हिरासत से बाहर आ सकेंगे, लेकिन उन्हें मजिस्ट्रेट की ओर से लगाई गई शर्त का पालन करना होगा। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर आगे भी चर्चा जारी रह सकती है।