मथुरा: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिमष्य रसिक दुलारी शरण की मौत को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामला सुलझने के बजाय लगातार नए सवाल खड़े कर रहा है। 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से गिरने के बाद रसिक दुलारी की मौत हुई थी। CCTV में मौत से पहले करीब 11 मिनट की गतिविधियां सामने आई हैं। कमरे से ग्राइंडर मिला, शरीर पर गंभीर चोटें थीं और पोस्टमार्टम में अत्यधिक रक्तस्राव को मौत का कारण बताया गया। पुलिस फिलहाल प्रथम दृष्टया आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है, जबकि परिवार ने साजिश की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
इस पूरी कहानी में एक नाम बार-बार सामने आ रहा है—संत प्रेमानंद महाराज।
क्योंकि रसिक दुलारी सिर्फ आश्रम में रहने वाले साधक नहीं थे। वह प्रेमानंद महाराज के दीक्षित शिष्य थे। करीब दो साल पहले उन्होंने दीक्षा ली, दीपक लोधी से अपना नाम बदलकर रसिक दुलारी शरण रखा और वृंदावन में रहने लगे।
यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि रसिक दुलारी की मौत कैसे हुई? सवाल यह भी है कि प्रेमानंद महाराज से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आया, परिवार से उनका संपर्क कितना रहा और घटना के बाद आश्रम की भूमिका को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
कौन थे रसिक दुलारी और प्रेमानंद महाराज से कैसे जुड़े?
रसिक दुलारी शरण का मूल नाम दीपक लोधी बताया गया है। वह मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। करीब दो साल पहले वह वृंदावन पहुंचे और संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली। दीक्षा के बाद उन्होंने रसिक दुलारी शरण नाम अपनाया और वृंदावन में रहकर आश्रम से जुड़ी गतिविधियों में सेवा करने लगे। यहीं से इस मामले में प्रेमानंद महाराज का कनेक्शन महत्वपूर्ण हो जाता है। परिवार के मुताबिक, दीक्षा के बाद दीपक ने सांसारिक जीवन से दूरी बना ली थी और परिवार से उनका संपर्क भी पहले जैसा नहीं रहा।
परिवार ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने दीपक से मिलने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात आसान नहीं रही। हालांकि, यह परिवार का पक्ष है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है।
प्रेमानंद महाराज के शिष्य बनने के बाद क्या बदला?
परिवार की ओर से सामने आए बयानों में कहा गया है कि प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद दीपक ने अपने पुराने जीवन और परिवार से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। कुछ रिपोर्टों में परिवार के हवाले से कहा गया है कि आश्रम में रहने के कारण उनसे संपर्क करना और मुलाकात करना मुश्किल हो गया था।
हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है—आध्यात्मिक जीवन अपनाना या परिवार से दूरी बनाना अपने आप में किसी गलत काम का सबूत नहीं है। लेकिन जब उसी व्यक्ति की बाद में आश्रम से जुड़े परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है, तो परिवार के लिए यह जानना स्वाभाविक है कि पिछले कुछ समय में उसकी जिंदगी में क्या चल रहा था।
इसीलिए पुलिस की जांच सिर्फ घटना वाले दिन तक सीमित नहीं रह सकती। रसिक दुलारी की पृष्ठभूमि और घटना से पहले की परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।
25 सितंबर की सुबह आखिर क्या हुआ?
25 सितंबर की सुबह रसिक दुलारी गुरु कृपा कुंज की इमारत में मौजूद थे। पुलिस द्वारा जांचे गए CCTV के मुताबिक, करीब 10:25 बजे वह अपने कमरे से बाहर निकले। इसके बाद उनकी गतिविधियां कैमरे में रिकॉर्ड हुईं। वह चौथी मंजिल की छत तक पहुंचे और करीब 10:36 बजे नीचे गिर गए। यानी कमरे से बाहर निकलने और गिरने के बीच करीब 11 मिनट का अंतर था। यही 11 मिनट अब इस केस की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, CCTV में रसिक दुलारी के कपड़ों पर खून के निशान भी दिखाई दिए। वह कुछ समय छत पर बैठे और फिर नीचे गिर गए। लेकिन CCTV यह नहीं बताता कि कमरे के अंदर उससे पहले क्या हुआ था। यही वजह है कि पुलिस CCTV के साथ कमरे से मिले साक्ष्यों, मोबाइल और फॉरेंसिक रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बना रही है।
ग्राइंडर और शरीर पर चोट ने केस क्यों उलझा दिया?
इस मामले की सबसे अहम और असामान्य कड़ियों में कमरे से मिला ग्राइंडर और शरीर के प्राइवेट पार्ट पर लगी गंभीर चोट शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस को कमरे से ग्राइंडर मिला था और शरीर पर कई गंभीर चोटें पाई गईं। अब जांच का सवाल यह है कि ये चोटें कब और किन परिस्थितियों में लगीं?
क्या ये चोटें चौथी मंजिल से गिरने से पहले की थीं? अगर हां, तो उस समय कमरे में क्या हुआ था? और अगर रसिक दुलारी कमरे से बाहर निकलते समय ही खून से सने दिखाई दे रहे थे, तो उनकी उस समय की स्थिति क्या थी?
इन सवालों का जवाब सिर्फ CCTV से नहीं मिल सकता। इसलिए फॉरेंसिक जांच इस केस में बेहद अहम हो जाती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, रसिक दुलारी की मौत हेमोरेजिक शॉक यानी अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई। रिपोर्टों में सिर, पसलियों, पैरों, फेफड़ों और प्राइवेट पार्ट समेत शरीर के कई हिस्सों में चोटों का उल्लेख किया गया है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण फर्क है।
पोस्टमार्टम यह बताता है कि मौत का मेडिकल कारण क्या था, जबकि पुलिस को यह पता लगाना है कि चोटें किस क्रम में और किन परिस्थितियों में लगीं। इसी वजह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद भी जांच खत्म नहीं हुई है।
मोबाइल में क्या तलाश रही है पुलिस?
रसिक दुलारी का मोबाइल भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले उन्होंने किन लोगों से बातचीत की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, मोबाइल में मौजूद डिलीटेड चैट, वीडियो और दूसरे डिजिटल डेटा की भी जांच की जा रही है। अगर कोई महत्वपूर्ण डेटा रिकवर होता है, तो उससे घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। यानी जांच अब सिर्फ कमरे और छत तक सीमित नहीं है। पुलिस रसिक दुलारी की डिजिटल गतिविधियों को भी खंगाल रही है।
रात 3 बजे परिवार आश्रम क्यों पहुंचा?
घटना के बाद परिवार के दावों ने मामले को और गंभीर बना दिया। परिवार के मुताबिक, उन्हें फोन पर बताया गया कि दीपक गिर गए हैं और उनका इलाज या ऑपरेशन चल रहा है। इसके बाद परिजन रात करीब 3 बजे वृंदावन पहुंचे। परिजनों का दावा है कि आश्रम पहुंचने के बाद उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा और घटना की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इसी को लेकर परिवार ने सवाल उठाए और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
हालांकि, यह परिवार का दावा है, पुलिस द्वारा स्थापित तथ्य नहीं। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि परिवार को घटना की जानकारी कब मिली, किसने दी और उनके आश्रम पहुंचने के बाद वास्तव में क्या हुआ।
प्रेमानंद महाराज से मिलने को लेकर परिवार ने क्या कहा?
परिवार की शिकायतों का एक हिस्सा यह भी है कि दीक्षा के बाद रसिक दुलारी से संपर्क करना मुश्किल हो गया था। परिवार के सदस्यों ने मीडिया से कहा कि उन्होंने उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन आसानी से मुलाकात नहीं हो पाई। अब यह बात इस केस में इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि रसिक दुलारी की जिंदगी में बड़ा बदलाव प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद ही आया था। लेकिन परिवार का यह दावा अपने आप में किसी अपराध या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी साबित नहीं करता।
पुलिस को यह देखना होगा कि परिवार के दावे, आश्रम में मौजूद लोगों के बयान और डिजिटल व फॉरेंसिक सबूत एक-दूसरे से कितने मेल खाते हैं।
प्रेमानंद महाराज की चुप्पी पर सवाल क्यों?
मामले में प्रेमानंद महाराज का नाम इसलिए प्रमुखता से सामने आ रहा है क्योंकि रसिक दुलारी उनके दीक्षित शिष्य थे और घटना आश्रम से जुड़े परिसर में हुई।
उपलब्ध रिपोर्टों में इस मामले पर प्रेमानंद महाराज या आश्रम की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने की बात कही गई है। इसी वजह से परिवार और सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस घटना पर आश्रम की तरफ से ज्यादा जानकारी क्यों नहीं दी गई।
पुलिस अब किन लोगों से पूछताछ कर रही है?
जांच अब सिर्फ परिवार और CCTV तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने रसिक दुलारी के साथ रहने वाले व्यक्ति और आश्रम में बिजली से जुड़े काम करने वाली टीम से भी पूछताछ की है। दूसरे साधकों से भी जानकारी ली जा रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले रसिक दुलारी की स्थिति कैसी थी और उस सुबह उनके आसपास कौन-कौन मौजूद था।
परिवार CBI जांच क्यों चाहता है?
परिवार ने मामले में CBI या उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि घटना की परिस्थितियां उन्हें संदिग्ध लगती हैं और कई सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं। परिवार की ओर से साजिश की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, CBI जांच की मांग होना और CBI जांच शुरू होना दो अलग बातें हैं।
फिलहाल स्थानीय पुलिस ही मामले की जांच कर रही है और CCTV, मोबाइल, फॉरेंसिक साक्ष्यों तथा लोगों के बयानों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
4 दिन बाद क्या पता है और क्या अब भी रहस्य है?
अब तक सामने आई जानकारी में यह स्पष्ट है कि रसिक दुलारी शरण प्रेमानंद महाराज के दीक्षित शिष्य थे, 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हुई, CCTV में करीब 11 मिनट की टाइमलाइन सामने आई और कमरे से मिले साक्ष्यों के साथ मोबाइल व फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
वहीं कई सवाल अभी भी जांच के घेरे में हैं—
* 10:25 से 10:36 बजे के बीच वास्तव में क्या हुआ?
* कमरे में लगी चोटों का पूरा घटनाक्रम क्या था?
* ग्राइंडर और खून के निशानों का फॉरेंसिक निष्कर्ष क्या होगा?
* मोबाइल से कोई महत्वपूर्ण डेटा रिकवर होता है या नहीं?
* परिवार के रात 3 बजे आश्रम पहुंचने के दावे की जांच में क्या सामने आता है?
* घटना से पहले रसिक दुलारी की परिस्थितियां कैसी थीं?
* और सबसे अहम—क्या 11 मिनट की CCTV टाइमलाइन पूरी कहानी बताती है?
फिलहाल रसिक दुलारी की मौत का अंतिम सच जांच से ही सामने आएगा। प्रेमानंद महाराज से उनका जुड़ाव इस केस का अहम संदर्भ है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उससे आगे कोई निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।
इस केस की सबसे अहम कड़ी फिलहाल वही 11 मिनट, CCTV फुटेज, फॉरेंसिक सबूत और वे सवाल हैं जिनके जवाब पुलिस को अभी तलाशने हैं।