चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर एक नई वैश्विक स्टडी में गंभीर तस्वीर सामने आई है। एक रिसर्च के मुताबिक, दुनिया में चबाने वाले तंबाकू से होने वाली बीमारियों और मौतों का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है। इनमें भारत भी प्रमुख देशों में शामिल है।
रिसर्च में ये बात आई सामने
रिसर्च के अनुसार, वर्ष 2023 में दुनियाभर में करीब 24.1 करोड़ लोग चबाने वाले तंबाकू का इस्तेमाल कर रहे थे। इसी साल इसके कारण लगभग 2.51 लाख लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया गया। इसका इस्तेमाल 60 से 64 वर्ष की उम्र के लोगों में सबसे अधिक दर्ज किया गया।
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज का हिस्सा है ये रिसर्च
यह अध्ययन ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) 2023 का हिस्सा है। इसमें वर्ष 1990 से 2023 के बीच 204 देशों और क्षेत्रों में चबाने वाले तंबाकू से जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में चबाने वाले तंबाकू के प्रभावों को अन्य प्रकार के स्मोकलेस तंबाकू से अलग करके देखा गया है।
अध्ययन की प्रमुख लेखिका ने कही ये बात
अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की रिसर्च साइंटिस्ट और अध्ययन की प्रमुख लेखिका गैब्रिएला गिल के मुताबिक, चबाने वाले तंबाकू की समस्या दुनिया के सभी हिस्सों में एक जैसी नहीं है। कुछ देशों में ही इसके कारण होने वाली बीमारियों और मौतों का बड़ा हिस्सा देखने को मिलता है, उन्होंने कहा कि अलग-अलग आबादी में इसके इस्तेमाल के तरीकों को समझना प्रभावी तंबाकू नियंत्रण नीतियां तैयार करने के लिए जरूरी है।
स्टडी में यह भी पाया गया कि पिछले कई दशकों में तंबाकू नियंत्रण को लेकर हुई प्रगति के बावजूद चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल में अपेक्षित कमी नहीं आई है। इससे होने वाले स्वास्थ्य नुकसान में स्ट्रोक और होंठ व मुंह के कैंसर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल
रिसर्च के मुताबिक, 2023 में दक्षिण एशिया चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल का सबसे बड़ा केंद्र रहा। यहां 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी में करीब 14.6 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे थे।
दक्षिण एशिया में इसी साल चबाने वाले तंबाकू से करीब 2.10 लाख मौतें होने का अनुमान है। यह वैश्विक स्तर पर दर्ज कुल मौतों का लगभग 84 प्रतिशत है।
पुरुषों और महिलाओं के बीच बड़ा अंतर
स्टडी में पुरुषों और महिलाओं के बीच भी इसके स्वास्थ्य प्रभावों में बड़ा अंतर सामने आया। पुरुषों में चबाने वाले तंबाकू से होने वाली मौतों और विकलांगता से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक स्वास्थ्य बोझ का संबंध भारत, बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान और अमेरिका समेत 10 देशों से पाया गया।
वहीं महिलाओं में 90 प्रतिशत से अधिक बोझ भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, म्यांमार और चीन सहित कुछ प्रमुख देशों में केंद्रित रहा। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि कुल मौतों और विकलांगता का बोझ केवल इस्तेमाल की दर पर निर्भर नहीं करता। बड़ी आबादी वाले देशों में उपयोग की दर अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद कुल मामलों की संख्या अधिक हो सकती है।
उम्र और लिंग के हिसाब से बदलता है इस्तेमाल
रिसर्च में चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल में उम्र और लिंग के आधार पर भी काफी अंतर पाया गया। IHME के हेल्थ मेट्रिक्स साइंसेज विभाग की प्रोफेसर और अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका इमैनुएला गाकिडोउ ने कहा कि इन अंतर को देखते हुए दुनिया के हर देश के लिए तंबाकू नियंत्रण की एक जैसी रणनीति प्रभावी नहीं हो सकती।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, तंबाकू छोड़ने और इसके इस्तेमाल को रोकने की योजनाओं में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसके लिए देश, उम्र और लिंग के आधार पर इस्तेमाल के पैटर्न के साथ-साथ उन सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों को भी समझना होगा, जो अलग-अलग क्षेत्रों में चबाने वाले तंबाकू के इस्तेमाल को प्रभावित करते हैं।
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