टीएनपी न्यूज़
ब्रेकिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 2 डाक टिकट जारी किए BRICS समिट 2026: शी जिनपिंग ने ग्रुप से ग्लोबल शांति में अहम भूमिका निभाने को कहा हम किसी के विरुद्ध नहीं, सबके साथ हैं': PM मोदी ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा पेजेशकियन ने BRICS बाजार का किया दौरा PM मोदी ने वियतनाम के PM से की मुलाकात हरियाणा में 36 दिन बाद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठकें में रक्षा और व्यापार पर जोर ईरानी राष्ट्रपति ने प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मु से की मुलाकात असम के सोनितपुर में दर्दनाक हादसा, कार और ट्रक की भिड़ंत में 5 की मौत दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने गौतम अडानी से की मुलाकात
स्वास्थ्य

लंबे समय तक बैठकर काम करना पड़ सकता है भारी, रिपोर्ट में कर्मचारियों की सेहत को लेकर चेतावनी

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल में तीन बार हेल्थ चेकअप कराने वाले कर्मचारियों में अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम देखा गया।

लंबे समय तक बैठकर काम करना पड़ सकता है भारी, रिपोर्ट में कर्मचारियों की सेहत को लेकर चेतावनी
health check-up

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और लगातार बढ़ते काम के दबाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। खासकर दफ्तरों में लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों में हृदय रोग, डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालिया एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो कर्मचारी साल में कम से कम तीन बार नियमित हेल्थ चेकअप कराते हैं, उनके अस्पताल में भर्ती होने की संभावना अन्य कर्मचारियों की तुलना में काफी कम होती है।

सिर्फ टेस्ट कराना नहीं, रिपोर्ट पर कार्रवाई भी जरूरी

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई कर्मचारी स्वास्थ्य जांच तो करा लेते हैं, लेकिन रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर से सलाह लेने या इलाज शुरू करने में लापरवाही बरतते हैं। आधे से अधिक लोग जांच के बाद कोई जरूरी कदम नहीं उठाते, जिससे बीमारी का खतरा बना रहता है और समय पर उपचार नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्थ चेकअप तभी प्रभावी माना जाएगा, जब उसके आधार पर उचित इलाज और नियमित फॉलो-अप भी किया जाए।

कर्मचारियों में बढ़ रही दिल की बीमारी और डायबिटीज

अध्ययन के अनुसार, कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के बीच हृदय रोगों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कम उम्र के कर्मचारियों में भी हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी अन्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इसके साथ ही डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना, तनाव, अपर्याप्त नींद और असंतुलित खानपान को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।

उम्र के साथ बदलती हैं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां

रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग आयु वर्ग के कर्मचारियों की स्वास्थ्य समस्याएं भी अलग होती हैं। युवा कर्मचारियों में तनाव और चिंता की समस्या अधिक देखने को मिलती है। वहीं 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में काम का दबाव, थकान और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अधिक उम्र के कर्मचारियों में पुरानी और गंभीर बीमारियों का जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।

ये भी पढ़ें- सुबह की बनी रोटी शाम तक रहेगी मुलायम, जानें नरमी बनाए रखने के ये आसान तरीके

कंपनियों को अपनाना होगा व्यापक हेल्थ मॉडल

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश कंपनियां अभी कर्मचारियों की सेहत के लिए केवल हेल्थ चेकअप तक ही सीमित हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि संस्थानों को नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ डॉक्टरों की सलाह, समय-समय पर फॉलो-अप और जरूरी मेडिकल सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए। इससे कर्मचारियों की सेहत बेहतर होगी और गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

 

  Written By Toshi Shah  

 

टीएनपी न्यूज़ की टीम देश-दुनिया की हर बड़ी ख़बर आप तक तेज़ी और सटीकता के साथ पहुँचाती है।

शॉर्ट वीडियो

सभी वीडियो