मानसून के दौरान सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और बदन दर्द जैसी परेशानियां आम मानी जाती हैं। मौसम में बदलाव के कारण लोग अक्सर इन लक्षणों को सामान्य वायरल इंफेक्शन समझकर ज्यादा ध्यान नहीं देते। हालांकि इस साल H1N1 इन्फ्लुएंजा के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं पिछले साल की तुलना में संक्रमण के मामले लगभग छह गुना ज्यादा हैं।
ऐसे हालात में बुखार, खांसी, बदन दर्द या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं है। खासकर अगर ये लक्षण अचानक शुरू हुए हो या लगातार बढ़ रहे हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
H1N1 क्या होता है?
H1N1, इन्फ्लुएंजा A वायरस का एक स्ट्रेन है। इसे आम भाषा में स्वाइन फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2009 में H1N1 संक्रमण के व्यापक प्रसार के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोषित किया था। उस दौरान दुनियाभर में करीब 2.84 लाख मौतों का अनुमान लगाया गया था।
H1N1 के लक्षण कई अन्य वायरल और सांस से जुड़ी बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। ज्यादातर संक्रमित लोग बिना गंभीर जटिलताओं के ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में फ्लू गंभीर रूप भी ले सकता है।
अचानक लक्षण शुरू होना हो सकता है संकेत
फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम में अंतर लक्षणों के शुरू होने के तरीके से भी समझा जा सकता है। सर्दी-जुकाम के लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे सामने आते हैं और उनकी तीव्रता कम हो सकती है। वहीं इन्फ्लुएंजा में बुखार और अन्य परेशानियां अचानक शुरू हो सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक फ्लू के दौरान अचानक बुखार, खांसी, सिरदर्द, गले में खराश, नाक बहना और मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द हो सकता है। इसके अलावा व्यक्ति को सामान्य से कहीं अधिक कमजोरी महसूस हो सकती है।
हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर यह पहचानना संभव नहीं है कि किसी व्यक्ति को H1N1 है या इन्फ्लुएंजा का कोई दूसरा स्ट्रेन। इसलिए फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
तेज बदन दर्द और कमजोरी को न करें नजरअंदाज
हल्के वायरल या सर्दी-जुकाम में थकान महसूस होना सामान्य है, लेकिन फ्लू में कमजोरी और थकावट अचानक काफी ज्यादा बढ़ सकती है। शरीर टूटने जैसा एहसास, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द और सिरदर्द भी इसके साथ हो सकते हैं।
कभी-कभी कमजोरी इतनी ज्यादा होती है कि व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी होने लगती है। अगर अचानक बुखार के साथ खांसी, बदन दर्द और अत्यधिक थकान होने लगे, तो इसे केवल मौसम का असर मानकर छोड़ना उचित नहीं है।
लगातार हो रही सूखी खांसी पर दें ध्यान
खांसी अपने आप में H1N1 की पहचान नहीं है, क्योंकि यह कई तरह के संक्रमण में हो सकती है। फिर भी इन्फ्लुएंजा के दौरान सूखी खांसी आम लक्षणों में शामिल हो सकती है। कुछ लोगों में संक्रमण के दूसरे लक्षण कम होने के बाद भी खांसी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
अगर खांसी लगातार बढ़ रही है, उपचार के बावजूद सुधार नहीं हो रहा या इसके साथ सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई है, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
सांस लेने में परेशानी को गंभीरता से लें
नाक बंद होने की वजह से सांस लेने में असुविधा होना और वास्तविक रूप से सांस फूलना अलग स्थितियां हैं। कुछ मामलों में इन्फ्लुएंजा निमोनिया जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है।
सांस फूलना, सांस लेने में कठिनाई, सीने में परेशानी या तेजी से स्वास्थ्य बिगड़ना ऐसे संकेत हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत होती है। जिन लोगों को पहले से हृदय या सांस संबंधी बीमारी है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि फ्लू उनकी मौजूदा समस्या को और गंभीर कर सकता है।
पहले सुधार के बाद फिर बिगड़ने लगे तब भी रहें सतर्क
फ्लू से पीड़ित ज्यादातर लोग लगभग एक सप्ताह के भीतर बुखार और अन्य प्रमुख लक्षणों से उबरने लगते हैं। हालांकि, खांसी कुछ और समय तक जारी रह सकती है।
ऐसे में अगर स्वास्थ्य में सुधार आने के बाद व्यक्ति की हालत अचानक दोबारा खराब होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बुखार या खांसी का फिर से बढ़ना किसी जटिलता या अतिरिक्त संक्रमण की ओर संकेत कर सकता है।
ऐसी स्थिति में लंबे समय तक इसे सामान्य वायरल मानकर घर पर ही इलाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच और उचित चिकित्सा सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।