नई दिल्ली : वरिष्ठ रंगकर्मी एवं नाटककार आलोक शुक्ला के चौथे नाट्य संग्रह ‘पतझड़ के फूल और देखोना’ का लोकार्पण शनिवार शाम नई दिल्ली स्थित श्री राम सेंटर के सामने संजना बुक्स प्रकाशन के स्टॉल ‘साहित्य के पेड़’ पर किया गया। इस अवसर पर साहित्य और रंगमंच जगत से जुड़े कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की और आलोक शुक्ला के नाट्य लेखन की सराहना की।
नाट्य संग्रह का लोकार्पण वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल, नाटककार एवं रंग समीक्षक राजेश कुमार, संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव एवं वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार, रंग निर्देशक प्रदीप बाजपेयी, वरिष्ठ लेखिका शशि सहगल, सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं रंगकर्मी श्रीकांत वर्मा, नाटककार अनिल ठाकुर और संजना बुक्स प्रकाशन की निदेशिका श्रीमती संजना तिवारी ने संयुक्त रूप से किया।
इस मौके पर संगीत नाटक अकादमी के राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल ने गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद आलोक शुक्ला के लगातार लेखन और निर्देशन कार्य को रेखांकित किया। उन्होंने संग्रह में शामिल दोनों नाटकों के प्रकाशन पर उन्हें शुभकामनाएं दीं।
संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव एवं वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने ‘पतझड़ के फूल’ और ‘देखोना’ के लेखन पर चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी में लगातार नए नाटक लिखे जा रहे हैं। उन्होंने नए नाटकों के मंचन के लिए रंगकर्मियों से आगे आने का आग्रह किया।
नाटककार एवं रंग समीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि आलोक शुक्ला का लेखन अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने ‘पतझड़ के फूल’ की विशेषता बताते हुए कहा कि इसमें बुजुर्ग व्यक्ति के जीवन और परिस्थितियों को केंद्र में रखकर नाटक के दो अलग-अलग अंत दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी लेखक द्वारा निर्देशक को अपनी रंग-दृष्टि के अनुसार अंत चुनने की स्वतंत्रता देना एक महत्वपूर्ण पहल है।
राजेश कुमार ने ‘देखोना’ को कोरोना काल के सामाजिक परिवेश और प्रभावों को समझने के लिए महत्वपूर्ण नाट्य दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह आज मोहन राकेश के नाटकों के माध्यम से एक दौर के सामाजिक परिवेश को समझा जाता है, उसी तरह भविष्य में ‘देखोना’ कोरोना काल की परिस्थितियों को समझने का माध्यम बनेगा। उन्होंने संग्रह की गुणवत्तापूर्ण प्रिंटिंग के लिए प्रकाशिका संजना तिवारी को भी बधाई दी।
इस अवसर पर रंग निर्देशक प्रदीप बाजपेयी, फिल्म अभिनेता एवं रंगकर्मी श्रीकांत वर्मा, वरिष्ठ रंग अभिनेता विपिन कुमार, वरिष्ठ लेखिका शशि सहगल और रांची से आए नाटककार अनिल ठाकुर ने भी आलोक शुक्ला की रंगयात्रा और नाट्य लेखन की सराहना की।
कार्यक्रम में नाटककार आलोक शुक्ला ने सभी अतिथियों, रंगकर्मियों और साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने नाट्य संग्रह के लोकार्पण पर मिली शुभकामनाओं के लिए सभी का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम में रंगकर्मी अभिमन्यु सिंह चौधरी, शिखा मल्होत्रा, रंग निर्देशक हिम्मत सिंह नेगी सहित कई साहित्य प्रेमी और रंगकर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन रोशन ने किया।
लोकार्पण समारोह के दौरान बड़ी संख्या में साहित्य एवं रंगमंच से जुड़े लोगों ने ‘पतझड़ के फूल और देखोना’ की प्रतियां खरीदीं और नाटककार आलोक शुक्ला से उन पर ऑटोग्राफ भी लिए।
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