श्रीनगर: नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) ने जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के सहयोग से श्रीनगर में उभरते लेखकों और थिएटर से जुड़े युवाओं के लिए विशेष राइटिंग वर्कशॉप आयोजित की। कार्यशाला में कला और रंगमंच में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को लेखन कौशल को बेहतर बनाने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग की बुनियादी समझ दी जा रही है।

मुंबई से आए NSD ट्रेनर राहुल शंकरिया कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। कक्षाओं में स्क्रिप्ट के मूल ढांचे पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसमें शुरुआत, मध्य बिंदु और क्लाइमेक्स जैसे प्रमुख हिस्से शामिल हैं।

रील्स और सोशल मीडिया के दौर में लेखन पर जोर

राहुल शंकरिया ने कहा कि आज विजुअल माध्यम तेजी से रील्स और सोशल मीडिया के दौर में पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक सामग्री पहुंचने के कारण इस माध्यम के लिए प्रभावी और जिम्मेदार लेखन जरूरी है।

उन्होंने कहा कि लेखन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह भी तय होता है कि दर्शकों तक किस तरह की जानकारी या संदेश पहुंच रहा है। फिल्म, सीरियल, ड्रामा, थिएटर, रेडियो या टेलीविजन-हर माध्यम में कहानी कहने के बुनियादी तत्वों और स्क्रीन के लिए लेखन की समझ महत्वपूर्ण है।

‘थिएटर को पुनर्जीवित करने के लिए लेखन पहला कदम’

वर्कशॉप में शामिल कला छात्र बासित अहमद ने थिएटर के लिए लेखन को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से थिएटर से जुड़े हैं और इसी वजह से उन्होंने कार्यशाला में हिस्सा लिया।

बासित के अनुसार, थिएटर में अभिनय और प्रस्तुति के साथ उसके पीछे का लेखन भी आधार का काम करता है। उन्होंने कहा कि NSD के प्रशिक्षकों द्वारा कराए गए ब्रेनस्टॉर्मिंग से उन्हें अपने भीतर एक लेखक की मौजूदगी महसूस हुई।

उन्होंने कहा कि कश्मीर से आने वाले लोगों के पास बताने के लिए बहुत-सी कहानियां हैं और कश्मीरी थिएटर को फिर से मजबूत करने के लिए केवल अभिनय या प्रस्तुति पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, थिएटर के पुनर्जीवन की शुरुआत लेखन से होनी चाहिए।

प्रतिभागियों ने NSD का जताया आभार

वर्कशॉप की प्रतिभागी मसरत ने NSD की पहल की सराहना करते हुए कहा कि करीब 15 दिनों से चल रही इस कार्यशाला से उन्हें लेखन की तकनीकों और मूल कौशल को समझने में काफी मदद मिली।

उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने पुराने और वर्तमान लेखन के बीच अंतर महसूस हो रहा है। मसरत ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह की और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे लेखकों और कलाकारों को सीखने और आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिल सकें।

एक अन्य प्रतिभागी जुद्दत ने कहा कि थिएटर, फिल्म निर्माण, स्क्रीनराइटिंग या किसी भी तरह की कहानी कहने के लिए लेखन आधार है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में उन्हें लेखन की बुनियादी संरचना, प्लॉट और किरदारों के निर्माण सहित स्टोरीटेलिंग के कई पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

उन्होंने हाल में आयोजित फिल्म फेस्टिवल का भी उल्लेख किया और कहा कि वहां दिखाई गई फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री के साथ आयोजित स्क्रीनराइटिंग मास्टरक्लास ने भी लेखन की भूमिका को समझने में मदद की।

जम्मू-कश्मीर में फिल्म और थिएटर गतिविधियों को बढ़ावा

हाल ही में जम्मू-कश्मीर सरकार ने जम्मू-कश्मीर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का पहला संस्करण भी आयोजित किया था। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ फिल्म निर्माता विधु विनोद चोपड़ा, श्रीराम राघवन, रमेश सिप्पी और अन्य फिल्म जगत की हस्तियों ने किया था।

श्रीनगर में आयोजित NSD की यह राइटिंग वर्कशॉप युवाओं को स्क्रिप्ट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग की बुनियादी समझ देने के साथ रंगमंच और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में उनके कौशल को विकसित करने का अवसर प्रदान कर रही है।

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