मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 30 सितंबर को शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी में मामूली गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर बनी हुई है।
कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 0.16 फीसदी की गिरावट के साथ रहा, जबकि सेंसेक्स करीब 132 अंक चढ़ा। इससे बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भारतीय बाजार दबाव में रहा था।
मंगलवार को निफ्टी 64.05 अंक यानी 0.28 फीसदी गिरकर 22,716.20 पर बंद हुआ था। वहीं सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33 फीसदी टूटकर 72,529.07 पर बंद हुआ। बाजार पर विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, ऊंची क्रूड कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का दबाव रहा।
कच्चे तेल की कीमत बनी चिंता
बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें अहम बनी हुई हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही है। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹9,980 करोड़ की निकासी की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹6,953 करोड़ की खरीदारी की।
बाजार में आगे क्या अहम रहेगा?
आने वाले कारोबार में कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की गतिविधि, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों के संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया से जुड़ी घटनाओं पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।
विदेशी निवेशकों की गतिविधि पर भी नजर
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। विदेशी पूंजी के बाहर जाने की स्थिति में घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।
इसके अलावा वैश्विक बाजारों के रुझान, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में निवेशक कच्चे तेल के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर भी नजर रख रहे हैं।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव, विदेशी निवेशकों का रुख और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत आने वाले कारोबारी सत्रों में महत्वपूर्ण रहेंगे।
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