बिजनेस
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उलटफेर, 7% गिरावट के बाद फिर तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को भारी गिरावट दर्ज करने के बाद मंगलवार को तेल बाजार में अचानक तेज उछाल देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को भारी गिरावट दर्ज करने के बाद मंगलवार को तेल बाजार में अचानक तेज उछाल देखने को मिला। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता दिखा। भारत में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चा तेल करीब 1.90 प्रतिशत चढ़कर 8,779 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव से कच्चा तेल की कीमतों में उछाल
विशेषज्ञों के मुताबिक इस अचानक तेजी की सबसे बड़ी वजह मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव है। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य घटनाक्रम ने बाजार में आपूर्ति को लेकर डर पैदा कर दिया है। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत चल रही थी। इसी दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड और खदानें बिछाने की कोशिश कर रही नौकाओं पर हमला कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की इस कार्रवाई के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ गई कि कहीं तेल आपूर्ति फिर से बाधित न हो जाए।
मीडिल ईस्ट में तनाव के चलते बढ़ी निवेशकों में अनिश्चितता
हालांकि,अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच शुरुआती समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है और आने वाले दिनों में स्थिति साफ हो सकती है। लेकिन निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार यह समझ नहीं पा रहा कि आने वाले समय में मध्य-पूर्व से तेल सप्लाई सामान्य रहेगी या फिर तनाव और बढ़ेगा।
ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा?
इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई थी। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान था जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी थी कि अगर बातचीत असफल रही तो अमेरिका और कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
शांति वार्ता के बावजूद तनाव क्यों बढ़ रहा?
मामले की जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का मुद्दा है। ईरान चाहता है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर उसका प्रभाव बना रहे, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसके खिलाफ हैं। यही कारण है कि शांति वार्ता के बावजूद तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा कीमतों पर पड़ रहा है।
Written By: Geeta Sharma
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