Pakistan: सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों का तांडव लगातार जारी है। विद्रोहियों द्वारा लगातार सऊदी के कई ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि मक्का पैक्ट के तहत पाकिस्तान और तुर्की ने अपनी सेना को सऊदी भेज दिया है। लेकिन आने वाले दिनों में पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती है। मालूम हो कि हूती विद्रोहियों की मदद ईरान द्वारा किया जा रहा है।

अगर समझे तो पाक और ईरान अच्छे दोस्त है और दूसरी तरफ विद्रोहियों के खिलाफ शहबाज सरकार ने सेना भेजी है। यानि पाक के लिए एक तरफ खाई और दूसरी तरफ कुआं जैसी स्थिति है। क्योंकि पाक सेना विद्रोहियों पर हमला करती है तो ईरान से दोस्ती टूटने का डर और अगर सेना कार्रवाई नहीं करती है तो पक्का पैक्ट का उल्लंघन हो जाएगा। आईए समझते है इसके मायने।

पाकिस्तान की हालत एक तरफ खाई दूसरी तरफ कुआं वाली

तुर्की की प्रमुख समाचार एजेंसी 'अनादोलु एजेंसी' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामाबाद के सामने एक ऐसी दुविधा है जिसमें दो ऐसे रिश्ते शामिल हैं जिन्हें बनाए रखने के उसके पास मजबूत कारण हैं - पहला, रियाद के साथ रक्षा और वित्तीय साझेदारी, और दूसरा, तेहरान के साथ सीमा सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय कूटनीति के मामलों में सहयोग।

यानि अगर पाक हूती विद्रोहियों पर हमला करता है तो ईरान से दोस्ती टूटने का डर, दूसरी तरफ मक्का पैक्ट का उल्लंघन शहबाज शरीफ को भारी पड़ सकता है।

सऊदी अरब की मदद पाकिस्तान के लिए क्यों बन सकती है चुनौती?

सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग से पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ सकती हैं। हाल के दिनों में यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। ऐसे माहौल में रियाद की सुरक्षा जरूरतें इस समझौते की वास्तविक परीक्षा बन सकती हैं।

पाकिस्तान के सामने मुख्य सवाल यह है कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को किस तरह पूरा करे, जबकि उसे अपने आर्थिक हालात, घरेलू सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतिक हितों का भी ध्यान रखना है। हालांकि यह तो आने वाले दिनों में ही पता लगेगा कि पाकिस्तान की स्थिति क्या होती है।