Barabanki Industrial Corridor: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे अब सिर्फ सफर आसान बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके किनारे उद्योगों और रोजगार की नई संभावनाएं भी आकार लेने लगी हैं। बाराबंकी के हैदरगढ़ में 241.4697 हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। परियोजना के लिए करीब 250 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है और अब विकास कार्य शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
इस औद्योगिक कॉरिडोर से पूर्वांचल और राजधानी लखनऊ के बीच औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ बिहार और झारखंड के निवेशकों की भी इस क्षेत्र में दिलचस्पी बताई जा रही है। परियोजना आगे बढ़ती है तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और आसपास के गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
250 करोड़ की मंजूरी के बाद जमीन जुटाने की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से विकसित की जा रही इस परियोजना के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित कॉरिडोर का कुल क्षेत्रफल 241.4697 हेक्टेयर है। इसमें करीब 221.07 हेक्टेयर निजी भूमि की जरूरत बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निजी भूमि के करीब 70 प्रतिशत हिस्से का अधिग्रहण किया जा चुका है। जिन जमीनों के लिए आपसी सहमति नहीं बन पाई है, वहां अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
इन छह गांवों की जमीन पर विकसित होगा कॉरिडोर
हैदरगढ़ औद्योगिक कॉरिडोर के दायरे में सतरही, बम्हरौली, पेचरूआ, बहरामपुर, घरकुइयां और अन्दूऊमऊ गांव शामिल हैं। परियोजना के तहत इन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की संभावनाएं तैयार की जा रही हैं। कॉरिडोर का उद्देश्य केवल उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी विकास को बढ़ावा देना है। उद्योग स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार, परिवहन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के अवसर बढ़ सकते हैं।
बिहार और झारखंड के निवेशकों को क्यों पसंद आ रही है लोकेशन?
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के जरिए लखनऊ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच बेहतर संपर्क उपलब्ध है। इसी कनेक्टिविटी को हैदरगढ़ औद्योगिक कॉरिडोर की बड़ी ताकत माना जा रहा है। सड़क मार्ग की सुविधा से उद्योगों को माल की आवाजाही और विभिन्न बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त दिनेश चौरसिया के मुताबिक, एक्सप्रेस-वे के कारण पूर्वांचल और लखनऊ के बीच संपर्क बेहतर हुआ है। इससे हैदरगढ़ की लोकेशन पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार और अन्य राज्यों के उद्यमियों के लिए भी महत्वपूर्ण बन रही है।
गांवों की तस्वीर बदलने की भी उम्मीद
औद्योगिक कॉरिडोर विकसित होने से इसके आसपास के गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। उद्योगों की स्थापना से स्थानीय लोगों को काम के अवसर मिल सकते हैं और परिवहन, आपूर्ति तथा अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कब पूरी होती है, विकास कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं और यहां कितनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित होती हैं।