बोइंची (हुगली): गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से शुरू हुई ‘जहां पड़े कदम गांधी के, एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा बुधवार को अपने छठे दिन नगर खान्यान से आगे बढ़ते हुए पांडुआ पार कर बोइंची पहुंची। सर्व सेवा संघ की ओर से आयोजित इस पदयात्रा का उद्देश्य प्रेम, शांति, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव का संदेश लोगों तक पहुंचाना है।
यात्रा में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 15 राज्यों के पदयात्री शामिल हैं। यात्रा का समापन 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन में होना है। आयोजकों के मुताबिक, रास्ते में पदयात्रियों को स्थानीय लोगों का सहयोग भी मिल रहा है।
सर्वधर्म प्रार्थना से हुई दिन की शुरुआत
छठे दिन की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना के साथ हुई। सुबह करीब 7 बजे यात्रा शुरू होने से पहले स्थानीय आयोजकों का आभार जताया गया। इस दौरान उन्हें सर्वोदय डायरी 2027 और महात्मा गांधी की आत्मकथा भेंट की गई।
ककाली टोला, पांडुआ पहुंचने पर स्थानीय व्यापारी दुलाल राय ने पदयात्रा के उद्देश्य से प्रभावित होकर यात्रियों के लिए पानी की बोतलों की व्यवस्था की। दुलाल राय का अपना बॉटलिंग प्लांट है।
यात्रा आगे बढ़ी तो रास्ते में गीतों और नारों के जरिए गांधी के विचारों और शांति का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। इसी दौरान 84 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक राजेंद्र बनर्जी को पदयात्रा के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने अपनी जेब से 20 रुपये निकालकर यात्रा के लिए सहयोग राशि के तौर पर दे दिए।
नुक्कड़ सभाओं में गांधी और टैगोर के विचारों पर चर्चा
बोइंची पहुंचने के रास्ते में कई जगह नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं। बिप्लब नायक ने यात्रा के उद्देश्यों के बारे में लोगों को लगातार जानकारी दी।
महाराष्ट्र के जलगांव से पदयात्रा में शामिल हुए सेवानिवृत्त शिक्षक विक्रम पाटिल ने कहा कि 2 अक्टूबर को बेलेघाटा स्थित गांधी भवन से शुरू हुई यात्रा का उद्देश्य प्रेम, स्नेह, सद्भाव और शांति का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में बढ़ते तनाव और आपसी टकराव के बीच महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर के विचार मार्गदर्शन दे सकते हैं। पाटिल ने 1947 में बेलेघाटा में गांधी के शांति प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि हिंदू-मुस्लिम तनाव के दौरान गांधी ने उपवास और प्रार्थना के माध्यम से शांति स्थापित करने का प्रयास किया था।
यात्रियों के मुताबिक, रास्ते में लोगों से संवाद, नुक्कड़ सभाओं और गीतों के जरिए पदयात्रा का संदेश साझा किया जा रहा है।
16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन में होगा समापन
विक्रम पाटिल ने रवींद्रनाथ टैगोर के राखी उत्सव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल विभाजन के दौरान टैगोर ने हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे के लिए रक्षाबंधन का आयोजन किया था। इसी ऐतिहासिक स्मृति के साथ पदयात्रा का समापन 16 अक्टूबर को शांतिनिकेतन में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यात्रा में बड़ी संख्या में युवा भी जुड़ रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गांधी के विचारों और शांति के संदेश को समझने के लिए यात्रा में शामिल हों। इस दौरान “आइए, दो कदम गांधी के साथ आप भी चलिए” और “जय जगत” का संदेश दिया गया।
‘इंसान को इंसान से जोड़ने की यात्रा’
सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने कहा कि यह पदयात्रा लोगों को बांटने की कोशिशों के विपरीत इंसान को इंसान से जोड़ने और एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि सर्व सेवा संघ लंबे समय से इंसानियत, संविधान, लोकतंत्र, उदारवादी परंपरा और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़े मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने लोगों से यात्रा में शामिल होने और प्रेम, इंसानियत, सद्भाव तथा शांति के संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की।