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स्पीकर ओम बिरला का विपक्ष को करारा जवाब, 'लोकसभा में नियमों से ऊपर कोई नहीं...'
12 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव के बाद लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला सदन में लौटे। उन्होंने अपने उपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि माइक बंद करने, विपक्ष को मौका न देने के आरोप निराधार हैं।
12 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव के बाद लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला सदन में लौटे। उन्होंने अपने उपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि माइक बंद करने, विपक्ष को मौका न देने के आरोप निराधार हैं। क्योंकि स्पीकर के पास माइक का बटन नहीं होता है। बता दें, बुधवार को उनके खिलाफ लोकसभा में विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया था। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद अब लोकसभा में लौट आए हैं।
ओम बिरला ने अपने संबोधन क्या-क्या कहा?
गुरुवार को ओम बिरला ने सदन को संबोधित किया। अपने संबोधन में स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की। मैंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सदन में प्रत्येक सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के भीतर मुद्दों पर अपने विचार प्रकट करे।"
'मैंने हमेशा लोगों को अपनी राय रखने के लिए प्रोत्साहित किया'
स्पीकर ओम बिरला ने आगे कहा कि लोकसभा ने मुझे हटाने के प्रस्ताव पर 12 घंटे तक चर्चा की, जिसे लेकर विपक्ष ने निष्पक्षता पर सवाल उठाया। विपक्ष को ओर से गया की सदन में उसकी आवाज दबाई गई। मैंने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सदन में हर सदस्य को नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार अपनी बात रखने का मौका मिले। मैंने हमेशा लोगों को अपनी राय रखने के लिए प्रोत्साहित किया है।
स्पीकर की कुर्सी सदन की प्रतिष्ठा का प्रतीक: ओम बिरला
इसके साथ ओम बिरला ने बताया कि जिस दिन उन्हें विपक्ष अध्यक्ष पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया, उसी दिन से वे सदन की कार्यवाही से दूर रहे है। कुर्सी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती बल्कि सदन की प्रतिष्ठा का प्रतीक होती है। सदन द्वारा मुझ पर विश्वास जताया गया उसके आभारी हूं।
'लोकसभा में नियमों से ऊपर कोई नहीं होता'
अपने संबोधन के अंत में स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी के आरोपों पर भी जवाब दिया। राहुल गांधी का आरोप है कि सदन में विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता, विपक्षी नेताओं के माइक बंद कर दिए जाते है। इस पर ओम बिरला ने कहा कि सदन में हर सदस्य को नियम के अनुसार बोलने का अधिकार है। लोकसभा में नियमों से ऊपर कोई नहीं होता है। वे सभी पर लागू होते हैं। यहां तक कि पीएम को भी बयान देने के लिए सदन के नियमों के तहत नोटिस देना पड़ता है।
Writen By: Geeta Sharma
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