कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। इस दौरान सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके मौजूद नहीं थे। बता दें कि उनकी दादी के निधन के बाद वह अपने पैतृक गांव चले गए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उन्हें भारत के इतिहास का सबसे कायर प्रधानमंत्री बताया। वहीं, सौरव दास ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए नीरव मोदी और विजय माल्या का जिक्र किया, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दोनों को देश छोड़कर जाने दिया, जबकि उन्हें फ्लाइट के भीतर से ही बाहर निकलवा लिया गया।

हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

शनिवार को हिरासत में लिए जाने की घटना का जिक्र करते हुए सौरव दास ने आरोप लगाया कि इस दौरान आवश्यक कागजी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, उनके मुताबिक, पुलिसकर्मी बिना किसी औपचारिक कार्रवाई के पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए, उन्होंने यह भी दावा किया कि महिला पुलिसकर्मियों के माध्यम से उनके फोन जब्त किए गए, लेकिन इस प्रक्रिया में कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं।

दास ने हिरासत के दौरान अलग-अलग स्थानों पर ले जाए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें आरके पुरम में रखा गया, जबकि आशुतोष रांका को बल्लभगढ़ ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि अभिजीत दीपके को भी किसी अन्य स्थान पर ले जाया गया था।

सौरव दास के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के बाद उन्होंने अपने वकील से बात करने के अधिकार के बारे में पूछा था, उनका आरोप है कि इस पर उन्हें बताया गया कि हिरासत के दौरान ऐसा कोई अधिकार नहीं होता, उन्होंने इस अनुभव के आधार पर दिल्ली पुलिस की प्रदर्शनकारियों के साथ होने वाली कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।

फोन क्लोन किए जाने की जताई आशंका

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव दास ने अपने फोन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की, उन्होंने आशंका जताई कि हिरासत के दौरान उनके मोबाइल फोन के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है और फोन का क्लोन तैयार किया गया हो सकता है, उन्होंने यह भी संदेह व्यक्त किया कि भविष्य में क्लोन किए गए फोन के डेटा को उनके खिलाफ सबूत के रूप में पेश किया जा सकता है।

हालांकि, फोन क्लोन किए जाने और संभावित सबूतों के इस्तेमाल को लेकर लगाए गए ये आरोप फिलहाल संबंधित वक्ताओं की आशंकाओं और दावों के रूप में सामने आए हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं होती है।