Lucknow News: एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति में मोहरा बनाने की कोशिश की जा रही है। राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग बांग्लादेश की घटनाओं की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं और उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना है।

लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में राजनीतिक टकराव और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग खुले तौर पर सरकार गिराने की बात कर रहे हैं।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना एजेंडा
राजनाथ सिंह ने कहा, 'बांग्लादेश की तर्ज पर रिजीम चेंज की बात करते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कह रहे हैं। डंके की चोट पर सरकार को गिराने की बात करते हैं। इनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है।'

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब एसआईआर की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों तथा कुछ संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों के पीछे चुनाव सुधार या युवाओं के भविष्य का मुद्दा नहीं, बल्कि अराजकता के जरिए सत्ता हासिल करने की मंशा है।

राहुल गांधी को दी आत्ममंथन की सलाह
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक हितों के लिए बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे आक्रोश, संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश और राजनीतिक अवसरवाद से देश की विकास यात्रा को प्रभावित नहीं किया जा सकता। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें व्यवधान की राजनीति करने के बजाय जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करना चाहिए।

SIR और ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी है विवाद
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस राजनीतिक माहौल के बीच बीजेपी और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। राजनाथ सिंह के बयान ने इस विवाद को और राजनीतिक धार दे दी है। हालांकि, सत्ता परिवर्तन की कथित साजिश और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप रक्षा मंत्री के राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 

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