नई दिल्ली: विरोध प्रदर्शनों और धरना-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और निष्पक्ष रिपोर्टिंग को लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। काउंसिल ने 15 अक्टूबर को हुई बैठक में ‘Guidelines for Journalists Covering Protests and Demonstrations’ को मंजूरी दी। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ जिम्मेदार रिपोर्टिंग और पुलिस, मीडिया संस्थानों तथा पत्रकारों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देना है।

काउंसिल ने पत्रकारों को सलाह दी है कि वे प्रदर्शन के दौरान अपनी पहचान स्पष्ट रखें, भीड़ में सावधानी बरतें और किसी भी पक्ष का समर्थन करने या टकराव भड़काने से बचें।

पहचान पत्र साथ रखें, पुलिस के निर्देशों का करें पालन

प्रेस काउंसिल के मुताबिक, पत्रकारों को अपने मीडिया संस्थान का वैध पहचान पत्र या PIB/DIP से मिली मान्यता साथ रखनी चाहिए और उसे स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहिए। भीड़ में पहचान पत्र की डोरी उलझने से बचाने के लिए उसे सुरक्षित रखने की भी सलाह दी गई है।

पत्रकारों को कानून-व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों के सामने शांति से अपनी पहचान बतानी चाहिए। उन्हें निष्पक्ष रहना चाहिए, किसी पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहिए और विवाद या टकराव को बढ़ावा देने से बचना चाहिए। सुरक्षा के लिए दिए गए वैध निर्देशों का पालन करने पर भी जोर दिया गया है।

भीड़ और टकराव से सुरक्षित दूरी बनाए रखें

गाइडलाइंस में पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों, विरोधी समूहों और पुलिस के बीच होने वाले टकराव से उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। भीड़ में चलते समय सावधानी बरतने और लगातार अपनी स्थिति का आकलन करने को कहा गया है, ताकि गिरने या भीड़ में कुचले जाने का खतरा कम हो।

पत्रकारों को कैमरे या रिकॉर्डिंग उपकरण पुलिस बैरिकेड, वाहनों अथवा अन्य उपकरणों पर इस तरह नहीं लगाने चाहिए, जिससे आवाजाही बाधित हो या संपत्ति को नुकसान पहुंचे।

इसके अलावा, आसपास के माहौल पर लगातार नजर रखने, भीड़ के व्यवहार में बदलाव, संभावित झड़पों और दूसरे खतरों को पहचानने की सलाह दी गई है। पत्रकारों को सुरक्षित निकास और बाहर निकलने के रास्तों की जानकारी पहले से रखनी चाहिए। धुएं या आंसू गैस की स्थिति में सुरक्षित रास्ते और आसपास के पहचान योग्य स्थानों की मदद से प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलने को कहा गया है।

प्राथमिक उपचार किट, पानी और आंखों की सुरक्षा का रखें ध्यान

प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को एक छोटी सुरक्षा किट साथ रखने की सलाह दी है। इसमें प्राथमिक उपचार का सामान, पानी, हल्का नाश्ता, टॉर्च, कपड़ा और आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी सामग्री शामिल हो सकती है।

खतरे के आकलन के आधार पर हेलमेट या सिर की सुरक्षा के उपकरण और बॉडी आर्मर का इस्तेमाल करने पर भी विचार करने को कहा गया है। पत्रकारों को प्राथमिक उपचार की बुनियादी जानकारी सीखने की सलाह दी गई है।

गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि पत्रकार आंसू गैस के गोले, फ्लैश-बैंग उपकरण या स्मोक ग्रेनेड को हाथ न लगाएं।

न्यूजरूम को पत्रकारों की लोकेशन पर नजर रखने की सलाह

काउंसिल ने मीडिया संस्थानों से कहा है कि वे न्यूजरूम में एक ऐसे संपर्क व्यक्ति को नामित करें, जो मौके पर मौजूद पत्रकारों की लोकेशन की जानकारी रख सके और आपात स्थिति में मदद के लिए समन्वय कर सके।

फ्रीलांस पत्रकारों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने किसी भरोसेमंद संपादक या संपर्क व्यक्ति को अपनी लोकेशन, असाइनमेंट की योजना और लौटने के अनुमानित समय की जानकारी दें।

पहले से तय प्रदर्शनों के लिए मीडिया संस्थानों को पुलिस और जनसंपर्क अधिकारियों के साथ समन्वय करने, संचार व्यवस्था और मीडिया के लिए निर्धारित स्थानों की जानकारी लेने को कहा गया है।

खबरों में निष्पक्षता और तथ्यों की पुष्टि जरूरी

प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को सटीक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने की हिदायत दी है। गाइडलाइंस के मुताबिक, सत्यापित तथ्यों, आरोपों और अपुष्ट दावों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। जानकारी की पुष्टि कई स्रोतों से की जानी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों, आयोजकों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों के बयानों की समान रूप से पत्रकारिता के मानकों के आधार पर जांच की जानी चाहिए। किसी भी दावे को प्रकाशित करते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि बयान किसने दिया है।

काउंसिल ने यह भी कहा है कि यदि इससे सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, तो पुलिस की वास्तविक समय की लोकेशन या सुरक्षित निकास मार्गों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए। पत्रकारों को देखी गई घटनाओं का वर्णन करना चाहिए और बिना प्रमाण किसी की मंशा के बारे में निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए।

नाबालिगों और घायलों की तस्वीरें लेते समय बरतें सावधानी

गाइडलाइंस में नाबालिगों, घायलों और संकट में फंसे आम नागरिकों की तस्वीरें या वीडियो बनाते समय विशेष सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है।

प्रेस काउंसिल ने स्पष्ट किया कि बेहतर फुटेज पाने की होड़, लाइव प्रसारण की प्रतिबद्धता या एक्सक्लूसिव खबर हासिल करने का दबाव पत्रकारों की सुरक्षा से ऊपर नहीं होना चाहिए।

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