Constipation Relief: अगर 3 दिन से पेट साफ नहीं हुआ है, पेट भारी लग रहा है या शौच के दौरान काफी जोर लगाना पड़ रहा है, तो यह कब्ज का संकेत हो सकता है। कब्ज के साथ गैस, ब्लोटिंग और बेचैनी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में खान-पान और रोजमर्रा की आदतों में कुछ बदलाव मददगार साबित हो सकते हैं। सूखा आलूबुखारा यानी प्रून्स भी कब्ज से राहत के लिए एक आसान प्राकृतिक विकल्प माना जाता है।

कब्ज में क्यों फायदेमंद हैं प्रून्स?

प्रून्स में फाइबर के साथ सोर्बिटोल नाम का शुगर अल्कोहल पाया जाता है। सोर्बिटोल का हल्का लैक्सेटिव प्रभाव हो सकता है और यह आंतों में पानी खींचने में मदद करता है। इससे मल नरम हो सकता है और उसे बाहर निकालना आसान हो सकता है। कुछ शोधों में कब्ज से राहत के लिए प्रून्स को प्रभावी पाया गया है। करीब 50 ग्राम यानी लगभग 7 मध्यम आकार के प्रून्स दिन में दो बार लेने पर भी अध्ययन किया गया है।

पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी

कब्ज के दौरान केवल प्रून्स खाना पर्याप्त नहीं है। शरीर में पानी की कमी होने पर मल सख्त और सूखा हो सकता है। इसलिए पूरे दिन पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। पानी के साथ फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने से भी मदद मिल सकती है। हालांकि, कुछ लोगों में स्पार्कलिंग वॉटर से गैस या ब्लोटिंग बढ़ सकती है।

डाइट में धीरे-धीरे बढ़ाएं फाइबर

सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और बीज फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। फाइबर मल की मात्रा बढ़ाने और उसे नरम बनाने में मदद कर सकता है। इसबगोल यानी साइलियम भी घुलनशील फाइबर का एक स्रोत है। हालांकि, अचानक बहुत ज्यादा फाइबर लेने से गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है, इसलिए इसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।

रोजाना थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी करें

लंबे समय तक बैठे रहने और कम शारीरिक गतिविधि से भी कब्ज बढ़ सकती है। रोज कुछ देर तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी हल्की गतिविधियां पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं।

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कॉफी से कुछ लोगों को मिल सकती है राहत

कुछ लोगों को कॉफी पीने के बाद शौच की इच्छा महसूस होती है। कैफीन पाचन तंत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम वाले कुछ लोगों में कैफीन से गैस या पेट की परेशानी बढ़ सकती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर कब्ज लगातार बनी रहती है, बार-बार होती है या घरेलू उपायों से राहत नहीं मिलती, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट बहुत ज्यादा फूलना या मल में खून जैसे लक्षण हों तो चिकित्सा सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। लैक्सेटिव दवाओं का नियमित इस्तेमाल भी डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह से ही करना चाहिए।


Disclaimer: यह खबर मात्र जानकारी के लिए है। किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।