
डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ाने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। लंबे समय तक कंट्रोल न रहने पर यह दिल, किडनी, नसों और आंखों पर भी बुरा असर डाल सकती है। आंखों से जुड़ी सबसे खतरनाक समस्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी, जिसे अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है।
डायबिटिक रेटिनोपैथी क्या होती है?
आंख के अंदर रेटिना होता है, जो देखने के लिए सबसे जरूरी हिस्सा है। इसमें बहुत छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं (कैपिलरीज़) होती हैं। जब ब्लड शुगर लंबे समय तक ज्यादा रहती है तो ये नाजुक नसें कमजोर हो जाती हैं और उनमें से खून या तरल बाहर निकलने लगता है। धीरे-धीरे रेटिना की कोशिकाएं खराब होने लगती हैं और नजर धुंधली दिखने लगती है।
शुरुआती लक्षण क्यों नहीं पता चलते?
यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है।
शुरुआत में न दर्द होता है, न कोई बड़ा लक्षण दिखता है।
जब तक धुंधलापन, काले धब्बे या दृष्टि की कमी महसूस हो, तब तक नुकसान काफी हो चुका होता है।
बचाव का सबसे अच्छा तरीका
आंखों की नियमित जांच कराए
हर 6 महीने में आंखों की जांच करानी चाहिए।
जांच के लिए डॉक्टर दवा डालकर पुतलियों को फैलाते हैं, ताकि रेटिना साफ दिखाई दे सके।
शुरुआती स्तर पर यदि रिसाव दिख जाए तो समय रहते इलाज करके आगे की समस्या को रोका जा सकता है।
इलाज के विकल्प
शुरुआती अवस्था: दवाओं और शुगर कंट्रोल से मैनेज किया जा सकता है।
मध्यम अवस्था: आंखों में लेजर ट्रीटमेंट करना पड़ सकता है।
गंभीर अवस्था: इंजेक्शन या एडवांस सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
नजर धुंधली होना
आंखों के सामने तैरते धब्बे या फ्लोटर्स दिखना
किसी हिस्से में साफ न देख पाना
बहुत गंभीर स्थिति में नजर लगभग चली जाना
डायबिटिक रेटिनोपैथी खतरनाक है, लेकिन समय पर जांच, शुगर को नियंत्रित रखने और डॉक्टर की सलाह से इसे रोका जा सकता है। याद रखें डायबिटीज सिर्फ शुगर लेवल नहीं बढ़ाती, यह आंखों की रोशनी भी छीन सकती है।
- YUKTI RAI