
गणेश चतुर्थी का दिन भगवान श्रीगणेश का जन्मोत्सव माना जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता गणपति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक गणेश जी की पूजा करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
गणेश चतुर्थी कब है?
साल 2025 में गणेश चतुर्थी का पर्व मंगलवार, 27 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। यह उत्सव 6 सितंबर अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इन 11 दिनों तक मंदिरों और घरों में "गणपति बप्पा मोरया" के जयकारे गूंजते रहेंगे और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश स्थापना का सबसे सही समय मध्याह्न काल माना जाता है, क्योंकि यही भगवान गणेश का जन्म समय है। इस बार स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:05 से दोपहर 1:40 बजे तक है।
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
गणेश जी की प्रतिमा
कलश, नारियल, सुपारी, आम्रपल्लव
रोली, चावल, दूर्वा (7, 11 या 21 तिनके)
मोदक या लड्डू, पंचमेवा, फल (कम से कम 5 प्रकार)
फूल और माला
दीपक, धूप, कपूर, घी
पान के पत्ते, गंगाजल, गुलाबजल
लाल और पीला वस्त्र, जनेऊ, चांदी का सिक्का
प्रसाद
पूजा शुरू करने से पहले सबसे पहले आसन पर बैठकर जल और कुश हाथ में लेकर यह शुद्धि मंत्र पढ़ें:
"ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥"
इसके बाद जल अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें। फिर आचमन कर हाथ धो लें और गणपति स्थापना करें।
गणेश पूजा में प्रमुख मंत्र
आवाहन मंत्र
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।
ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आनः शृण्वन्नूतिभिःसीदसादनम्॥
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि। तन्नो दंति: प्रचोदयात्॥
मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
विघ्न विनाशक मंत्र
सिंहवाहन ओंकार, मोदक प्रिय करुणाकर।
विघ्नहर्ता मंगलकर्ता, चतुर्भुज धारी करुणासागर॥
भगवान गणेश के 21 नाम
गणेश जी की स्थापना के बाद उनके 21 नामों का जप करना शुभ माना जाता है। जैसे –
ओम गं गणपतये नमः, ओम गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः, ओम गं हेरम्बाय नमः, ओम गणञ्जयाय नमः, ओम गं महागणपतये नमः, ओम गं काश्यपाय नमः, ओम गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः, ओम गं चिंतामणये नमः, ओम गं मंत्राय नमः, ओम गं धरणीधराय नमः, ओम गं आशापूरकाय नमः, ओम गं वाचासिद्धाय नमः, ओम गं लक्षप्रदाय नमः, ओम गं नन्दनाय नमः, ओम गं शिवाय नमः, ओम गं ढुण्ढिविनायकाय नमः, ओम गं बीजाय नमः, ओम गं वरदाय नमः, ओम गं अमृताय नमः, ओम गं निधये नमः, ओम गं अमोघसिद्धये नमः
मान्यता है कि इन नामों के जप से साधक को आंतरिक शांति, बुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- YUKTI RAI