
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे लिए, हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सबसे ऊपर है। भारत ने, आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के मार्ग पर काफी दूरी तय कर ली है और प्रबल आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद हमारे देश में लोकतंत्र फलफूल रहा है।
संबोधन की शुरूआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि, "स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस सभी भारतीय उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं। यह दिवस हमें भारतीय होने के गौरव का विशेष स्मरण करवाता है। 15 अगस्त की तारीख, हमारी सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है।"
"बलिदान के बल पर हासिल की थी स्वाधीनता "
उन्होंने आगे कहा कि, "औपनिवेशिक शासन की लंबी अवधि के दौरान अनेक पीढ़ियों ने ये सपना देखा था कि एक दिन देश स्वाधीन होगा। देश के हर हिस्से में रहने वाले पुरुष और महिलाएं, बूढ़े और जवान विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ फेंकने के लिए व्याकुल थे। कल जब हम अपने तिरंगे को सलामी दे रहे होंगे तो हम उन सभी स्वाधीनता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे जिनके बलिदान के बल पर 78 साल पहले 15 अगस्त के दिन भारत ने स्वाधीनता हासिल की थी।"
"सभी वयस्कों को मतदान का अधिकार"
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कहा कि, "अपनी स्वाधीनता को पुनः प्राप्त करने के बाद, हम एक ऐसे लोकतन्त्र के मार्ग पर आगे बढ़े जिसमें सभी वयस्कों को मतदान का अधिकार था। दूसरे शब्दों में कहें तो, हम भारत के लोगों ने, अपनी नियति को स्वरूप देने का अधिकार स्वयं को अर्पित किया। अनेक लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं में, gender, religion तथा अन्य आधारों पर लोगों के मताधिकार पर पाबंदियां होती थीं। परंतु, हमने ऐसा नहीं किया। चुनौतियों के बावजूद, भारत के लोगों ने लोकतंत्र को सफलतापूर्वक अपनाया।"
उन्होंने आगे कहा कि, "लोकतन्त्र को अपनाना हमारे प्राचीन लोकतांत्रिक मूल्यों की सहज अभिव्यक्ति थी। भारत-भूमि, विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती रही है। इसे लोकतंत्र की जननी कहना सर्वथा उचित है। हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर, हमारे लोकतन्त्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतन्त्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया जिनसे लोकतान्त्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली।"
-Shraddha Mishra