
रक्षाबंधन एक पवित्र त्योहार है जो भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई जीवनभर बहन की रक्षा करने का वचन देता है। यह त्योहार सिर्फ भाई-बहन के खून के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षासूत्र का बंधन भावनात्मक सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।
इतिहास और पौराणिक कथाएं
कृष्ण और द्रौपदी की कथा
महाभारत के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण को चोट लग गई और रक्त बहने लगा। द्रौपदी ने तत्काल अपनी साड़ी फाड़कर उनका घाव बांध दिया। इस पर कृष्ण ने वचन दिया कि वे जीवन भर उसकी रक्षा करेंगे। इसे रक्षाबंधन की परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
रानी कर्णावती और हुमायूं
राजस्थान की रानी कर्णावती ने जब बहादुर शाह के आक्रमण से अपने राज्य को असुरक्षित पाया, तो उसने मुग़ल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी और रक्षा की गुहार की। हुमायूं ने राखी का सम्मान करते हुए रानी की सहायता की। यह घटना भी राखी के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।
संतोषी माता की कथा
भगवान गणेश के पुत्र शुभ और लाभ ने बहन की इच्छा जताई, तो गणेश जी ने संतोषी माता की रचना की। इसी दिन को रक्षाबंधन के रूप में भी मनाया जाता है, जिससे यह त्योहार गणेश भक्तों के बीच भी लोकप्रिय है।
धार्मिक मान्यता
हिंदू धर्म में श्रावण मास की पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन पवित्र स्नान और ब्राह्मणों को यज्ञोपवीत (जनेऊ) बांधने की परंपरा भी होती है। रक्षाबंधन के दिन पुरोहित भी अपने यजमानों को रक्षा-सूत्र बांधते हैं।
समाज में रक्षाबंधन का विस्तृत रूप
आज रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर महिलाएं सैनिकों, डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, और समाज के रक्षकों को भी राखी बांधती हैं। यह समाज में सौहार्द, भाईचारे और सुरक्षा की भावना को बढ़ावा देने वाला पर्व बन चुका है।
Written By-Anjali Mishra