
1947 में देश का बंटवारा होने के बाद, काफी संख्या में मुस्लिम देश छोड़कर पाकिस्तान गए थे। वहीं, पाकिस्तान से भी काफी सारे हिंदू लोग भारत आए थे। उसी समय 1954 में संसद ने यह वक्फ एक्ट 1954 के नाम से कानून बनाया गया था।इस तरह पाकिस्तान जाने वाले लोगों की जमीनों और संपत्तियों का मालिकाना हक इस कानून के जरिए वक्फ बोर्ड संस्था को दे दिया गया था।
1955 में यानी कानून लागू होने के एक साल बाद, इस कानून में संशोधन कर हर राज्य का वक्फ बोर्ड बनाए जाने की बात उ़़ठी। इस वक्त देश में अलग-अलग प्रदेशों के करीब 32 वक्फ बोर्ड हैं, जो वक्फ की संपत्तियों की देखरेख में हैं। बिहार समेत कई प्रदेशों में शिया और सुन्नी मुस्लिमों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड भी संचालन में हैं।
दरअसल, वक्फ बोर्ड के पास किसी जमीन या संपत्ति को लेने और दूसरों के नाम पर ट्रांसफर करने का कानूनी अधिकार होता है। बोर्ड किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी नोटिस भी जारी कर सकता है। बता दें की, किसी ट्रस्ट से ज्यादा पावर वक्फ बोर्ड के पास रहती है।
हालही में, ईद के दिन देश में कई जगह नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समाज के लोग वक्फ बिल के विरोध में काली पट्टियां बांधकर पहुंचे थे। रमजान के आखिरी जुम्मे (जुमातुल विदा) के दिन 28 मार्च को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने देशभर के मुसलमानों से काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने जाने की अपील की थी।
बता दें की, वक्फ संशोधन बिल को 2 अप्रैल को संसद में पेश किया जा सकता है और सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा। सरकार पहले लोकसभा में बिल पेश करेगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा हम संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं बिल पर संसद के बाहर खूब विचार-विमर्श भी हुए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने भी 29 मार्च को एक निजी चैनल के माध्यम से बजट सत्र में वक्फ बिल संसद में पेश करने की बात कही थी। शाह ने यह भी कहा कि इस बिल से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।