India foreign exchange: भारत में त्योहार सीजन शुरु होने वाल है। जिसमें खर्चे बढ़ना लगभग तय माना जाता है। आम लोगों पर विदेशी मुद्रा भंडार का अच्छा खासा असर देखा जाता है। इस समय वैश्विक संकट के तौर पर मीडिल इस्ट के बीच चल रहे विवाद का बड़ा असर भी विदेशी मुद्रा भंडार पर देखने को मिला है। 25 सितंबर को खत्म हो चुके एक सप्ताह वाले विदेशी मुद्रा भंडार के जारी आंकड़ों ने रिजर्व बैंक को घाटे में डाल दिया है। इसकी वजह से भारत में विदेशी मुद्रा भंडार 18.343 अरब डॉलर से घटकर 747.557 अरब डॉलर आ गया है।

पूर्व के सप्ताह में भी हुई थी गिरावट

इससे पूर्व वाले सप्ताह की अगर बात की जाए तो इसमें 14.881 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी जो, 765.901 अरब डॉलर पर आ गया था।भारत में त्योहार सीजन शुरु होने वाल है। जिसमें खर्चे बढ़ना लगभग तय माना जाता है। आम लोगों पर विदेशी मुद्रा भंडार का अच्छा खासा असर देखा जाता है। इस समय वैश्विक संकट के तौर पर मीडिल इस्ट के बीच चल रहे विवाद का बड़ा असर भी विदेशी मुद्रा भंडार पर देखने को मिला है।

25 सितंबर को खत्म हो चुके एक सप्ताह वाले विदेशी मुद्रा भंडार के जारी आंकड़ों ने रिजर्व बैंक को घाटे में डाल दिया है। इसकी वजह से भारत में विदेशी मुद्रा भंडार 18.343 अरब डॉलर से घटकर 747.557 अरब डॉलर आ गया है। इससे पूर्व वाले सप्ताह की अगर बात की जाए तो इसमें 14.881 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी जो, 765.901 अरब डॉलर पर आ गया था।

आईएमएफ रिजर्व पोजीशन में घटी विदेशी मुद्रा

रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों की माने तो भारत में विदेशी मुद्रा भंडार का आंकडा 25 सितंबर तक एक हफ्ते वाले आंकड़ों के हिसाब से 18.343 अरब डॉलर घटकर 747.557 अरब डॉलर पर आ गया है। शुक्रवार को जारी आकंड़ो के मुताबिक विदेशी मुद्रा संपत्ति 15.57 अरब डॉलर, सोना 2.591 अरब डॉलर, एसडीआर 97 मिलियन डॉलर और आईएमएफ में रिजर्व पोजीशन 86 मिलियन डॉलर घट गई। विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर वाले सप्ताह में 785.706 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर आ पहुंची। 

क्या कहते हैं IMF के आंकड़े?

आम भाषा में विदेशी मुद्रा भंडार को फॉरेक्स रिजर्व भी कहा जाता है। जिसमें विदेशी करेंसी के तौर रूप में जुटाई गई संपत्ति, गोल्ज, SDR और IMF के साथ जमा की गई राशि को भी आंकड़ों में जुटाया जाता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने 1 हफ्ते के आंकड़ों में इसे 18.343 अरब डॉलर दर्ज किया है। यानी सीधे तौर पर भारत की विदेशी मुद्रा भंडार में घाटा।

ऐसे में अब भंडार घटकर 747.557 अरब डॉलर नीचे लुढ़क गया है। रिजर्व बैंक ने इससे पहले वाले सप्ताह का आंकड़ा भी जारी किया। यह पहला हफ्ता नहीं था जिसमें गिरावट हुई है। इससे पहले वाले मतलब 25 सितंबर से पूर्व वाले हफ्ते में आकंड़े जारी किए थे उसमें भी लगातार गिरावट देखी गई। उस समय 14.881 अरब डॉलर घटकर 765.901 अरब डॉलर रह गया था

क्या त्योहार के समय होगी वृद्धि?

सीधे तौर पर यह कहा जा सकता है कि भारत की विदेशी मुद्रा में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन आने वाले समय में इसे लेकर आशंका जताई जा रही है। इसमें वृद्धि होना संभव है। गौर करने  वाली बात यह है कि 4 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में भंडार को अपने अभी तक के सबसे उंचे स्तर 785.706 अरब डॉलर पर पहुंच था।

उस समय इसमें वृद्धि का बड़ा कारण रियायती स्वैप योजना माना गया। यह स्वैप विदेश में बसे भारतीय समुदाय से मिलने वाले जमा के लिए था। जिसके माध्यम से बैंकों ने रिकॉर्ड 130 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम इक्ट्ठा की है। 

यूरो, पाउंड और येन में दिखा उतार चढ़ाव

25 सितंबर वाले सप्ताह की गणना की जाए तो भंडार का एक प्रमुख हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्ति यानी फॉरेन करेंसी एसेट्स होता है। विदेशी मुद्रा 15.57 अरब डॉलर से घटकर 615.411 अरब डॉलर आ गई। इस संपत्ति में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर अमेरिकी करेंसी के रेस में उतार चढ़ाव देखने को मिला। यानी करेंसी के मजबूत या कमजोर होने से भी विदेशी मुद्रा पर इसका असर दिखता है।

एसडीआर यानी स्पेशल डॉइंग राइट्स में आया घाटा

भारत में विदेश मुद्रा भंडार के बाद सोने के भंडार में 2.591 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई, जो 108.701 अरब डॉलर आ पहुंची। एसडीआर यानी स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स के आकंड़ों के हिसाब से 97 मिलियन डॉलर घटकर 18.642 अरब डॉलर पर आ गए।

IMF के पास भारत की रिजर्व पोजीशन भी 86 मिलियन डॉलर घटकर 4.804 अरब डॉलर पर आ गई। इस तरह विदेशी मुद्रा संपत्ति, सोना, एसडीआर और आईएमएफ वाली पोजीशन, चारों हिस्सों में उस हफ्ते गिरावट दर्ज की गई।

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