उत्तर प्रदेश के संभल में आज यानी मंगलवार 18 अगस्त 2026 को संभल में चल रहे जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में अहम पीठ सर्वे के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करेगी। मस्जिद कमेटी ने सर्वे आदेश को चुनौती दी थी। साल 2024 में संभल में इस मस्जिद और मंदिर को लेकर हिंसा भी भड़की थी। इतिहास में अगर देखा जाए तो संभल में मार्च 1978 में भी सांप्रदायिक दंगो की आग भड़की थी। उसके बाद साल 24 नवंबर 2024 को हुए संभल दंगों ने कई लोगों के जहन में पुरानी हिंसा को ताजा कर दिया।

19 नवंबर साल 2024 में हरिहर मंदिर होने का किया गया ता दावा

हिंदू पक्ष से अधिवक्ता विष्णु जैन इस मामले में प्रदेश सरकार के पक्षकार हैं। दरअसल पूर्व में यूपी सरकार द्वारा समय मांगने पर मामले में 25 अगस्त तारीख दी गई। 19 नवंबर साल 2024 को हिंदू पक्ष ने संभल की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा किया था। इस पर सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम के समय पहले चरण का और 24 नवंबर 2024 को दूसरे चरण का सर्वे किया था। इसी दिन संभल में हिंसा भी भड़की थी।

जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर की रार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

मामला कोर्ट की चौखट पर पहुंटा तो ने 18 मई 2025 को चंदौसी की शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर में सर्वे के मुद्दे को जायज बताते हुए न्यायमूर्ति रंजन अग्रवाल (सिविल जज कोर्ट) ने याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद एक जुलाई 2025 में मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में फिर से एक याचिका दायर की जिसके बाद मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। याचिका में हरिहर मंदिर का दावे को गलत बताते को कहा कि इसका निर्माण मुगलकालीन समय का है। लेकिन हिंदू पक्ष की तरफ से अधिवक्ता ने इस हरिहर मंदिर होने का दावा किया। हिंसा को जहां पुलिस ने शांत कराया था तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यूपी सरकार को शांति बनाए रखने के निर्देश दिए।

कोर्ट के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की

11 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संभल शाही मस्जिद से जुड़े सर्वे पर चल विवाद की आगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 यानी आज मंगलवार को तय की। मस्जिद प्रबंधन समिति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उप आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें नीचली अदालत द्वारा सर्वे कराने जाने को सही ठहराया। इस पूरे मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने होने ही। मस्जिद समिति की तरफ से कोर्ट के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को मस्जिद समिति ने चुनौती दी

दरअसल इस पूरे मामले में शुरू से प्रकाश डाला जाए तो 19 मई साल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को मस्जिद समिति ने चुनौती दी। इसके अंतर्गत साही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद में सर्वे कराने के आदेश को बरकरार रखा गया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश करे क्योंकि मामला सुनवाई योग्य है। दलील में इस बात का भी उल्लेख था कि दिसंबर 2024 में शीर्ष अदालत के जारी किए आदेश के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट को सर्वे आगे बढ़ने से रोकना चाहिए था।

मस्जिदों और दरगाहों पर दावा करने वाले नए मामलों को स्वीकृति देने पर रोक

11 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों को धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से मस्जिदों और दरगाहों पर दावा करने वाले नए मामलों को स्वीकृति के साथ-साथ लंबित मामलों में अंतिम आदेश पेश करने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी जाए। यह आदेश प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन्स) एक्ट, 1991 की विभिन्न धाराओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया था।

याचिका में क्या कहा?

याचिका में आरोप है कि मुगल सम्राट बाबर ने सन 1526 में हरिहर मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाया था। सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को संभल की कोर्ट में मस्जिद और उसके सर्वे से जुड़े मामले में कार्यवाही रोकने का निर्देश दिया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को संभल में शांति और सद्भाव बनाए रखने के निर्देश दिए थे। फिलहाल मामले में आज बड़ी सुनवाई होनी है जिसपर सभी की निगाहे टीकी है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट में जामा मस्जिद के पक्ष में फैसला आने के बाद अजान होगी या सुप्रीम कोर्ट हिंदू पक्ष में फैसला सुनाएगा जिसके बाद हरिहर मंदिर में आरती के साथ घंटे की आवाज आएगी।

 

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Written By: MADHVI TANWAR