देश की अग्रणी आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने अपने पुराने संस्थान आईआईटी बॉम्बे के लिए 315 करोड़ रुपये की बड़ी आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। इसे किसी भी भारतीय शैक्षणिक संस्थान को उसके पूर्व छात्र द्वारा दिया गया अब तक का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है। यह घोषणा उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से अपनी पढ़ाई पूरी किए 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की।

पहले भी कर चुके हैं बड़ा सहयोग
यह पहली बार नहीं है जब नीलेकणि ने अपने संस्थान के लिए उदारता दिखाई हो। इससे पहले भी वे आईआईटी बॉम्बे को 85 करोड़ रुपये की सहायता दे चुके हैं। नए योगदान को जोड़ने पर उनका कुल सहयोग लगभग 400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो संस्थान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

शिक्षा, रिसर्च और स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
आईआईटी बॉम्बे प्रशासन के अनुसार, इस राशि का उपयोग आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने, अत्याधुनिक तकनीकी शोध को बढ़ावा देने, इंजीनियरिंग के नए क्षेत्रों में अनुसंधान को मजबूत करने और स्टार्टअप्स के लिए बेहतर नवाचार इकोसिस्टम विकसित करने में किया जाएगा। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शुभासिस चौधरी ने कहा कि यह योगदान आईआईटी बॉम्बे की भविष्य की योजनाओं को गति देगा और वैश्विक स्तर पर संस्थान की शोध क्षमता को और मजबूत करेगा।

सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक संदेश
दान की घोषणा के साथ नंदन नीलेकणि ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक संदेश भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि आईआईटी बॉम्बे केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और करियर की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि यह योगदान केवल धनराशि नहीं, बल्कि उस संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है जिसने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाली पीढ़ियों के छात्र इस सहयोग से नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे।

आईआईटी से इंफोसिस तक का सफर
कर्नाटक में 2 जुलाई 1955 को जन्मे नंदन नीलेकणि ने 1973 बैच में आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। बाद में वे इंफोसिस के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए और भारतीय आईटी उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

written by Rozi Sinha