Who Is Justice Ravi Kumar Diwakar: ज्ञानवापी मामले से देशभर में चर्चा में आए वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनकी सुरक्षा से जुड़ा है। मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान कई गंभीर आपराधिक मामलों में मौत की सजा सुनाने वाले दिवाकर ने बिना अनुमति अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था में फेरबदल और पुलिस ड्यूटी से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप लगाए हैं।
बताया जा रहा है कि दिवाकर को पहले भी धमकी भरे पत्र और संदेश मिल चुके हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को बदलने के फैसले को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
चार महीने में 22 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा
मुजफ्फरनगर में जस्टिस रवि कुमार दिवाकर ने पिछले कुछ महीनों में कई चर्चित आपराधिक मामलों में सख्त फैसले सुनाए हैं। जानकारी के मुताबिक, 6 अप्रैल को अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद 28 अप्रैल को एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के मामले में चार दोषियों को फांसी की सजा दी गई। वहीं 30 मई को एक, 20 जून को दो और जुलाई में अलग-अलग मामलों में सात दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई।
अगस्त में भी 12 अगस्त को एक और 13 अगस्त को चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। इस तरह करीब चार महीने की अवधि में उनके द्वारा 22 दोषियों को मौत की सजा सुनाए जाने की बात सामने आई है।
किन मामलों में सुनाई गई मौत की सजा?
जस्टिस दिवाकर के फैसलों में हत्या, लूट और अन्य गंभीर आपराधिक मामले शामिल हैं। इनमें ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड की हत्या का मामला भी शामिल है। इसके अलावा हाईवे पर लूट के बाद हत्या करने के मामले में भी दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई। इससे पहले बरेली में तैनाती के दौरान उन्होंने 2014 के ट्रिपल मर्डर और डकैती के मामले में चिमार हसन गैंग के आठ सदस्यों को मौत की सजा सुनाई थी।
ज्ञानवापी मामले से देशभर में मिली पहचान
रवि कुमार दिवाकर को सबसे ज्यादा पहचान ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे के आदेश के बाद मिली थी। साल 2022 में वह वाराणसी में सिविल जज के पद पर तैनात थे। उन्होंने पांच हिंदू महिलाओं की याचिका पर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया था।
16 मई 2022 को हुए सर्वे के दौरान वजूखाने में एक आकृति मिलने का दावा किया गया। हिंदू पक्ष ने इसे शिवलिंग बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस दावे को खारिज किया था। इसके बाद संबंधित हिस्से को सील कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वाराणसी जिला जज की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था।
धमकियों के बीच सुरक्षा में बदलाव पर नाराजगी
ज्ञानवापी मामले के बाद से ही जस्टिस दिवाकर की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रही है। जून 2022 में उन्होंने पुलिस को धमकी भरा पत्र मिलने की जानकारी दी थी। कथित तौर पर यह पत्र ‘इस्लामिक आगाज मूवमेंट’ के नाम से भेजा गया था। 2025 में चित्रकूट में तैनाती के दौरान भी उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी। अब मुजफ्फरनगर में उन्होंने बिना उनकी अनुमति के सुरक्षा में बदलाव किए जाने पर आपत्ति जताई है।
आरआई पर लगाए ड्यूटी में अनियमितता के आरोप
जज की ओर से भेजे गए पत्र में रिजर्व पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) उदल सिंह की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी और तैनाती में अनियमितताएं की जा रही हैं। पत्र में कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की मनचाही तैनाती के लिए लेन-देन के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
कई जिलों में कर चुके हैं सेवा
रवि कुमार दिवाकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में न्यायिक सेवा दे चुके हैं। वह आजमगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और चित्रकूट में तैनात रह चुके हैं। 29 नवंबर 2025 को उन्होंने मुजफ्फरनगर में पदभार संभाला था। अब सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला चर्चा में है। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और लगाए गए आरोपों की जांच को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर बनी हुई है।
Written by Shailesh Yadav