Justice Yashwant Varma Cash Case: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से मिले कैश मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट सामने आ गई है। बुधवार को लोकसभा में पेश की गई रिपोर्ट में कमेटी ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है।रिपोर्ट में कहा गया है कि घर से मिले कैश को लेकर जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं थे। कमेटी ने जांच के दौरान मिले सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

मामला पिछले साल 14 मार्च की रात का है, जब दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम को वहां रखे सामान के बीच 500-500 रुपये के जले हुए नोट मिले थे। उस समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे।कैश मिलने की जानकारी सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। जस्टिस वर्मा ने दावा किया था कि बरामद हुई रकम उनकी नहीं थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया।

जांच में क्या सामने आया?

जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोपों को सही बताया है। कमेटी ने यह भी कहा कि कैश बरामदगी से जुड़े सवालों पर उनके जवाब स्पष्ट नहीं थे।रिपोर्ट के साथ जांच से जुड़े दस्तावेज, कार्रवाई का रिकॉर्ड और अन्य सबूत भी सौंपे गए हैं। अब आगे की प्रक्रिया इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तय होगी।

आग की घटना के बाद शुरू हुई थी जांच

14 मार्च 2025 की रात जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान स्टोररूम में कुछ जले हुए नोट मिले थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी बनाई थी।बाद में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर 200 से ज्यादा सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव की मांग भी की थी।अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि उनका इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं किया गया है।

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?

जस्टिस यशवंत वर्मा का जन्म 6 जनवरी 1969 को इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम और रीवा यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की।साल 1992 में उन्होंने वकालत शुरू की। अक्टूबर 2014 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया। इसके बाद फरवरी 2016 में वह स्थायी जज बने।अक्टूबर 2021 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट भेजा गया था। मार्च 2025 में कैश बरामदगी विवाद के बाद उनका तबादला वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया।

Written By: Shivashakti Narayan Singh