Relief russian oil tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिवाली से पहले भारत को राहतभरा तोहफा दिया है। जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले अधिनियम के तहत लगाए गए सीमाओं और टैरिफ को माफ कर दिया है। इतना ही यह राहत चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को भी यह राहत दी गई है।

प्रतिबंध अधिनियम के तहत किया ऐलान

लिंडसे ओ. ग्राहम द्वारा 2026 में रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम का हवाला देते हुए ट्रंप ने यह ऐलान किया है। जिसमें ट्रंप को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और चीन और भारत सहित रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों पर टैरिफ लगाने का अधिकार दिया है। इस कानून को मुख्य तौर से दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कांग्रेस में समर्थन में दिया था। इसमें रूस से कच्चे तेल या गैस के 5 सबसे बड़े खरीदारों से अमेरिका में आने वाले सामान पर 30 दिनों में 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान था।

पहले ही कर दिए था ऐलान

दरअसल ट्रंप ने कानून के कई प्रावधानों के लागू होने से कुछ दिन पहले इसकी घोषणा कर दी थी। सितंबर में ट्रंप ने इस विधेयक पर कानूनी तौर पर हस्ताक्षर किए। शुक्रवार शाम को कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने औपचारिक ऐलान कर कहा, मैं ग्राहम अधिनियम में निर्धारित ऐसे प्रतिबंधों, सीमाओं और कर्तव्यों के आवेदन को माफ कर रहा हूं।

ऐलान में रूस को क्या कहा?

अपने आदेश में उन्होंने एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है जिसमें कहा गया है कि इस स्तर पर छूट देना अमेरिकी राष्ट्रीय हित में है। यह आदेश ऐसे समय आया है जब ट्रंप ने रूस के प्रति नरम रुख अपनाया है, जबकि सार्वजनिक रूप से यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की की आलोचना की है। उन्होंने यह ​​सुझाव तक दिया कि यूक्रेन को नए नेता की जरूरत है। प्रस्तावित रूसी प्रतिबंधों ने उन देशों में भी चिंताएँ बढ़ा दी थीं जो रूसी तेल आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं।

भारत है रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार

रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भारत है। भारत उन देशों में शामिल था जिन्होंने इस कानून के बारे में चिंता व्यक्त की। यहां समझिए भारत के लिए इसका क्या अर्थ है? दरअसल रूस भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। आने वाले दिनों में 100 प्रतिशत तक टैरिफ में छूट मिलने की संभावना है, इसका मतलब है भारत बिना किसी आर्थिक नुकसान के मॉस्को से बड़ी मात्रा में तेल आयात करना जारी रख सकता है।

भारत है अमेरिका का व्यापारिक साझेदार

अगर ट्रंप प्रशासन द्वारा 100 प्रतिशत टैरिफ वसूला जाता तो निर्यातकों को भारी नुकसान होना तय था। क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है। किसी भी तरह के प्रतिबंध से रूसी कच्चे तेल का आर्थिक रूप से खरीद महत्वपूर्ण है।

लेकिन मीडिल ईस्ट तनाव के बीच आपूर्ति की कमी और बढ़ जाती है। इसी बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को कम करने के लिए अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटा दिया, लेकिन उन प्रतिबंधों के समाप्त होने के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी।

प्रतिबंध हटने से होगी प्रगति

पिछले महीने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रतिबंध विधेयक पर हस्ताक्षर करने के कदम का असर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की वार्ता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। अब प्रतिबंध हटाए जाने के बाद इस दिशा में कुछ प्रगति देखने को मिल सकती है, खासकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा हाल ही में मसौदा लगभग तैयार होने का संकेत दिए जाने के बाद।

 भारतीय रिफाइनर कंपनियों को उम्मीद

चीन के साथ तेल के लिए प्रतिस्पर्धा लेकिन रूसी तेल से संबंधित टैरिफ का खतरा कम होने के बावजूद, भारत को मॉस्को से कच्चे तेल के लिए चीन के साथ आक्रामक रूप से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है। भारतीय रिफाइनर कंपनियों को उम्मीद है कि अक्टूबर और नवंबर में रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति और भी कम हो जाएगी क्योंकि निर्यात में गिरावट आएगी और चीन से प्रतिस्पर्धा तेज हो जाएगी।

महंगे विकल्पों का करना पड़ा था रूख

इस कमी के कारण दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक देश को साल के बाकी बचे समय में अधिक महंगे विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है। हाल के महीनों में, दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक चीन ने अपनी खरीद बढ़ा दी है क्योंकि ईरान युद्ध ने मध्य पूर्व से आपूर्ति को बाधित कर दिया है।

चीन ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार

रूसी कच्चे तेल की बिक्री से जुड़ी जानकारी के मुताबिक चीन से इस समय वास्तव में बहुत ज्यादा मांग हो रही है। चीन कार्गो बुक करने और भारतीय रिफाइनरों की तुलना में अधिक कीमत देने को भी तैयार था। हालांकि अक्टूबर के केप्लर डेटा के आंकड़ों से तेल की आपूर्ति में सुधार हो रहा की सूचना मिली। फिलहाल यह औसतन 2 मिलियन बैरल प्रति दिन से ऊपर है।

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