Maldives: भारत ने मालदीव के साथ आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाते हुए 30 अरब रुपये यानी ₹30,000 करोड़ की करेंसी स्वैप सुविधा को अगले चरण के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। 16 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस खबर के मुताबिक, भारत ने मालदीव की ओर से इस वित्तीय सुविधा को आगे बढ़ाने के अनुरोध को स्वीकार किया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब मालदीव अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि मालदीव कई लिहाज से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। वहीं अब भारत के इस कदम से चीन की बेचैनी बढ़ सकती है।

क्या है भारत की ₹30 अरब की करेंसी स्वैप सुविधा?

करेंसी स्वैप सुविधा को आसान भाषा में समझें तो यह दो देशों के बीच मुद्रा के आदान-प्रदान से जुड़ी एक वित्तीय व्यवस्था होती है। इसके जरिए किसी देश को जरूरत के समय दूसरी मुद्रा में धन उपलब्ध हो सकता है, जिससे भुगतान संबंधी दबाव कम करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

भारत और मालदीव के बीच यह व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी (MMA) के समझौते के तहत है। इसकी रूपरेखा अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान तय की गई थी। यह सुविधा सार्क देशों के लिए 2024-2027 की करेंसी स्वैप व्यवस्था का हिस्सा है।

चीन की क्यों बढ़ी बेचैनी?

मालदीव हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर स्थित है। यहां से गुजरने वाले समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इसी वजह से भारत और चीन, दोनों की इस क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक दिलचस्पी रही है।

चीन ने भी मालदीव में निवेश और विकास परियोजनाओं के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। ऐसे माहौल में भारत की ओर से वित्तीय सहयोग जारी रखना मालदीव के साथ उसके रिश्तों को मजबूत करने का संकेत है।

भारत-मालदीव संबंधों के क्या हैं मायने?

इस फैसले से दोनों देशों के बीच वित्तीय सहयोग जारी रहने का संकेत मिलता है। मालदीव को अपनी आर्थिक जरूरतों के प्रबंधन में मदद मिल सकती है, जबकि भारत को अपने पड़ोसी देश के साथ संबंध मजबूत रखने का अवसर मिलता है।

कुल मिलाकर, ₹30 अरब की करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की मंजूरी भारत की क्षेत्रीय साझेदारी और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के अनुरूप है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि मालदीव इस सुविधा का इस्तेमाल कैसे करता है और आने वाले समय में दोनों देश आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।