Meerut Industrial Corridor: गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे मेरठ को बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार यहां करीब 2,000 एकड़ जमीन पर औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके पूरा होने पर छोटे-बड़े उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने के साथ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाले गंगा एक्सप्रेसवे के सभी 12 जिलों में औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। इनमें मेरठ की लोकेशन को खास माना जा रहा है। इसी वजह से यहां तीन चरणों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की तैयारी की गई है। पहले चरण में जमीन की खरीद और भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि दूसरे चरण में किसानों के विरोध के चलते प्रशासन को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

पहले चरण में 530 एकड़ जमीन पर तैयार होंगे 23 भूखंड
औद्योगिक गलियारे के पहले चरण के लिए खरखौदा और बिजौली गांवों में करीब 530 एकड़ यानी 213 हेक्टेयर जमीन की खरीद लगभग पूरी हो चुकी है। इसमें केवल 18 हेक्टेयर जमीन विवादित बताई गई है, जिसके अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इस क्षेत्र में कुल 23 भूखंडों का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इनके आवंटन की प्रक्रिया की जा रही है। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी विकास कार्य शुरू करने की तैयारी भी है। इसके लिए एजेंसी का चयन किया जा चुका है और एजेंसी ने मौके पर अपना प्लांट भी स्थापित कर लिया है।

दूसरे चरण में किसानों का विरोध, आठ विभागों की समिति गठित
पहले चरण से सटे छतरी, गोविंदपुर और खड़खड़ी गांवों में दूसरे चरण के लिए करीब 722 एकड़ यानी 294 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित है। इसके लिए भूमि खरीद की अधिसूचना जारी की जा चुकी है, लेकिन किसान जमीन देने के विरोध में धरने पर बैठे हैं। किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने आठ विभागों की समिति गठित की है। समिति किसानों से बातचीत कर उन्हें मनाने और उनकी आपत्तियों का समाधान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान कर भूमि खरीद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

तीसरे चरण के लिए 742 एकड़ जमीन की तलाश
मेरठ में औद्योगिक गलियारे का विस्तार करने के लिए तीसरे चरण की तैयारी भी शुरू हो गई है। इसके तहत करीब 742 एकड़ यानी लगभग 300 हेक्टेयर जमीन चिह्नित करने का प्रस्ताव मांगा गया है। जिला प्रशासन तहसील स्तर पर जमीन की पहचान करने में जुटा है। तीनों चरणों की जमीन को मिलाकर प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे का क्षेत्रफल करीब 1,994 एकड़ होगा। इससे मेरठ में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश के लिए जमीन उपलब्ध कराने की योजना है।

औद्योगिक विकास से रोजगार और कारोबार को मिलेगी गति
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाला यह औद्योगिक गलियारा मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में कारोबार तथा औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की क्षमता रखता है। बेहतर सड़क संपर्क से कंपनियों को परिवहन और माल की आवाजाही में सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, दूसरे चरण की जमीन खरीद में किसानों की सहमति और भूमि संबंधी प्रक्रियाएं परियोजना की प्रगति के लिए अहम रहेंगी।

जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के मुताबिक, प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि के लिए नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास जरूरी है। शासन के निर्देशों के तहत जिले में जमीन चिह्नित करने और खरीदने की कार्रवाई की जा रही है। तीनों चरण विकसित होने के बाद मेरठ का औद्योगिक गलियारा बड़े क्षेत्र में फैल जाएगा। 

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