Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने के साथ चांदनी में खीर रखने की परंपरा है। इस बार पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर की सुबह से शुरू होकर 26 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी। ऐसे में पूजा किस समय करनी चाहिए, खीर कब रखनी है और उसका सेवन कब करना उचित माना जाता है, इसे लेकर लोगों के मन में सवाल हैं।
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजकर 56 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखी जाती है। वहीं, स्नान और दान जैसे कार्य 26 अक्टूबर को तिथि समाप्त होने से पहले किए जा सकते हैं।
शरद पूर्णिमा 2026 पर पूजा और खीर रखने का शुभ समय
भद्रा रहित समय में खीर रखने के लिए रात 10 बजकर 32 मिनट से 12 बजकर 22 मिनट तक का समय शुभ माना गया है। वहीं, लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 32 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान माता लक्ष्मी की पूजा करने के साथ लक्ष्मी सूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात विधि-विधान से पूजा करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
सुबह खाएं या रात में, कब करें शरद पूर्णिमा की खीर का सेवन?
शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चांदनी में रखनी चाहिए। इसे ऐसे ढक्कन या जाली से ढकें, जिससे खीर में धूल-मिट्टी न जाए और चंद्रमा की रोशनी भी उस तक पहुंच सके। परंपरा के अनुसार, खीर को रातभर चांदनी में रखने के बाद अगली सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यानी खीर रात में रखी जाती है और उसका सेवन अगले दिन सुबह किया जाता है।
खीर बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाते और उसे चांदनी में रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखने की धार्मिक मान्यता है।
- खीर बनाने के लिए गाय के दूध का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।
- दूध और चावल की खीर चांदी या मिट्टी के बर्तन में बनाने की परंपरा है।
- खीर को जालीदार ढक्कन से ढकें, ताकि वह सुरक्षित रहे और चांदनी भी उस तक पहुंच सके।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, खीर को लोहे के बर्तन में रखने या लोहे की रस्सी से टांगने से बचना चाहिए।
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा क्यों होती है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा की रात को खास महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। इसी वजह से चंद्रमा की पूजा करने और उनकी रोशनी में खीर रखने की परंपरा प्रचलित है।हालांकि, चंद्रमा की रोशनी से खीर में औषधीय गुण बढ़ने या अमृत बरसने जैसी बातें धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं समझना चाहिए।
डिस्क्लेमर: पूजा के मुहूर्त और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी जानकारी पंचांग एवं मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।