Kaal Ashtami : हिंदू पंचांग व नक्षत्रों की गणना के हिसाब से हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत किया जाता है। कालाष्टमी पर भगवान शंकर के उग्र और रक्षक विग्रह स्वरूप काल भैरव की पूजा अर्चना करने का विधान है। धर्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा,व्रत और भैरव मंत्रों का जाप करने से इंसान को भय,नकारात्मक शक्तियों और शत्रु बाधाओं से राहत मिलती है। तंत्र साधना के लिए भी कालाष्टमी को विशेष माना जात है। भैरव को मनानने के लिए विधि-विधान से आराधना करने वाले शख्स को आर्थिक परेशानियां भी दूर होती हैं। भगवान काल भैरव की उपासना से भय से मुक्ति,आत्मविश्वास की वृद्धि और जीवन में स्थिरता आती है। आज कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि वैसे भी शुभ नक्षत्र में होने वाली है।
कालाष्टमी पर कैसे करे काल भैरव को प्रसन्न?
वैदिक पंचांग के मुताबिक भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:25 बजे होगा। अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर 2026 को रात 12:13 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के अनुसार कालाष्टमी व्रत 4 सितंबर 2026 शुक्रवार के दिन होगा। भक्त आज शुक्रवार को काल भैरव की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
जानिए कालाष्टमी व्रत की क्या है महिमा?
काल भैरव भगवान शंकर के उग्र,न्यायप्रिय और रक्षक स्वरूप है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक कालाष्टमी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने व व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। भक्तों को पापों से मुक्ति, कष्टों से राहत के साथ-साथ शिव की कृपा भी प्राप्त होती है। इस दिन उपासना करने से राहु दोष के प्रभाव को भी कम किया जाता है। इसे जीवन में सुख,शांति मिलती है।
कैसे करें कालाष्टमी की पूजा विधि?
कालाष्टमी पर सुबह जल्दी स्नान करके कपड़े धारण करें।
इसके बाद शकर और भगवान काल भैरव की पूजा का संकल्प लें। दीपक जलाकर धूप और पूजा का समान अर्पित करें। श्रद्धा से भगवान काल भैरव का ध्यान कर अपनी मनोकामना मांगे। जरूरतमंदों को दान करना भी शुभ माना जाता है।
दीपक प्रज्वलन: सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक में थोड़े काले तिल या उड़द के दाने डाल दें।
पूजन सामग्री: बाबा को सिंदूर, चंदन, अक्षत और नीले या काले फूल अर्पित करें।
भोग: आटे से बनी हुई मीठी पूरी हलवा या जलेबी का भोग लगाएं, साथ ही पान, सुपारी और काले तिल का भोग भी उत्तम माना जाता है।
मंत्र जाप: “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार श्रद्धापूर्वक जाप करें।
वाहन सेवा: काल भैरव के वाहन काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ फल देता है।
भैरव अष्टकम या भैरव चालीसा का पाठ और "ओम काल भैरवाय नमः" जैसे मंत्र पूजा के आवश्यक घटक हैं।
काल भैरव मंत्र
1. ॐ काल भैरवाय नमः
2. ॐ कालकाया विद्महे,कालतीतया धीमहि,तन्नो काल भैरवः प्रचोदयात्।
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