नेपाल इस समय भीषण बाढ़ और भूस्खलन की मार झेल रहा है। तेज बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई शहरों और गांवों में हालात बेहद खराब हो गए हैं। कई जगह पुल और सड़कें पानी में बह गईं, जबकि तेज बहाव में कारों और ट्रकों के बहने के दृश्य भी सामने आए हैं। इस आपदा में अब तक 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 700 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे करीब 400 तीर्थयात्री रासुवागढ़ी इलाके में संपर्क से बाहर हो गए हैं। काठमांडू स्थित एत ट्रैवल्स एंड टूर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अधिकारी के मुताबिक, बुधवार को 93 नेपाली नागरिकों समेत 390 तीर्थयात्रियों को सीमा पार करनी थी, उन्होंने बताया कि दोपहर 3 बजे तक अधिकांश यात्रियों से संपर्क स्थापित नहीं हो सका था। बाढ़ का असर कोशी और त्रिशूली नदी बेसिन से जुड़े कई इलाकों में देखने को मिल रहा है। नुवाकोट, धादिंग, चितवन, गोरखा और आसपास के जिलों में भारी नुकसान की खबर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दक्षिण-पश्चिम चीन के शिज़ांग क्षेत्र में ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट के आसपास नेपाल में भूस्खलन से प्रभावित और लापता लोगों की तलाश तथा बचाव अभियान को पूरी ताकत से चलाने का निर्देश दिया है।

पीएम मोदी ने बलेंद्र शाह से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बातचीत कर आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की, उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत की राहत एवं बचाव टीमें भी नेपाल के साथ समन्वय में काम कर रही हैं।

अमित शाह ने नेपाल हादसे पर जताया दुख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नेपाल में आई बाढ़ पर दुख जताया, उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत की ओर से नेपाल के लिए मानवीय सहायता, आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी गई हैं, उन्होंने आपदा से प्रभावित लोगों और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भारत की ओर से हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।

हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश- रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी और मित्र देश नेपाल की मुश्किल घड़ी में हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

नेपाल ने भारत की मदद के लिए जताया आभार

भारत की ओर से नेपाल को भेजी गई राहत सामग्री में अस्थायी आश्रय के सामान, कंबल, सोलर लैंप और जरूरी दवाइयां शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने सहायता के लिए एस. जयशंकर और भारत सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारत की त्वरित प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी और आपसी सहयोग को दर्शाती है।

राहत अभियान में भारतीय वायुसेना भी सक्रिय

नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद भारतीय वायुसेना ने भी राहत अभियान में सहयोग बढ़ाया है। वायुसेना का C-130J विमान करीब 10 टन आवश्यक राहत सामग्री और दवाइयां लेकर नेपाल रवाना किया गया है। जरूरत के अनुसार आगे C-17 और C-130 विमानों के जरिए अतिरिक्त राहत सामग्री भेजने की तैयारी है। इसके अलावा, प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलिकॉप्टरों को भी तैयार रखा गया है। भारत और नेपाल की एजेंसियां मिलकर राहत एवं बचाव अभियान को तेज करने की कोशिश कर रही हैं।