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तकिया बदलने में देरी बन सकती है बीमारी की वजह, जानें कब बदलें और क्यों
अच्छी नींद में तकिए का अहम योगदान होता है। चलिए आपको बताते हैं कि आपको अपने इस तकिए को कितने साल में बदल देना चाहिए, ताकि कोई हेल्थ से जुड़ी कोई दिक्कत न हो।
अच्छी और गहरी नींद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होती है। केवल समय पर सोना ही काफी नहीं है, बल्कि बेडरूम का माहौल और बिस्तर भी सही होना चाहिए। इसमें तकिए की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि तकिया सही सपोर्ट नहीं देता, तो नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय-समय पर तकिए की स्थिति जांचना और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना जरूरी है।
त्वचा पर दाने हो सकते हैं
हम रोज कई घंटों तक सिर को तकिए पर रखकर सोते हैं, इसलिए उसकी सफाई और गुणवत्ता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, अगर तकिया लंबे समय तक नहीं बदला जाए, तो इससे एलर्जी, त्वचा पर दाने और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
पीले दाग दिखे तो बदले तकिया
नींद से जुड़ी विशेषज्ञों के अनुसार, तकिए को हर 1 से 2 साल में बदल देना चाहिए, ताकि वह साफ, आरामदायक और एलर्जन-फ्री बना रहे। हालांकि, इसकी उम्र तकिए के मटेरियल और गुणवत्ता पर भी निर्भर करती है, अगर सुबह उठते समय गर्दन में दर्द या अकड़न महसूस हो, या आरामदायक स्थिति न मिले, तो यह संकेत हो सकता है कि तकिया अब सही सपोर्ट नहीं दे रहा। समय के साथ तकिए में भी गांठें पड़ जाती हैं, इसलिए उन्हें बदलना बेहतर होता है। इसके अलावा तकिए पर पीले दाग दिखना या एलर्जी बढ़ना भी उसे बदलने का संकेत है।
तकियों की होती उम्र
अलग-अलग मटेरियल के तकियों की उम्र अलग होती है। पॉलिएस्टर तकिए आमतौर पर लगभग एक साल चलते हैं, जबकि लेटेक्स जैसे मजबूत मटेरियल वाले तकिए तीन साल तक चल सकते हैं। फोम की गुणवत्ता और घनत्व भी इसकी उम्र तय करते हैं।
ऐसे रखे ध्यान
तकिए की साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है। हर बार चादर धोते समय तकिए का कवर भी बदलना चाहिए। कई तकिए मशीन में धोए जा सकते हैं, जिससे उनमें जमा धूल, पसीना और गंदगी कम होती है और उनकी उम्र बढ़ती है। पुराने तकियों में धूल के कण, फंगस, फफूंदी और पालतू जानवरों के बाल जमा हो सकते हैं, जो एलर्जी का कारण बनते हैं। इससे नाक बहना, आंखों में जलन और त्वचा में खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं, साथ ही चेहरे और बालों का तेल, पसीना और लार तकिए में दाग भी छोड़ सकते हैं।
रीढ़ की हड्डी में होती है दर्द
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकिया सिर और गर्दन को सही सहारा देने के लिए होता है। जब यह समय के साथ दब जाता है, तो रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में नहीं रख पाता, जिससे गर्दन, कंधों और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।
Written By Toshi Shah
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