लाइफस्टाइल
दुनिया में चला नया ट्रेंड…फ्लाइट में हो रहे हैं 'सीट डिवोर्स'! जानिए अलग-अलग क्यों बैठ रहे कपल्स?
आजकल कपल्स खुद को समय देने के लिए तरह- तरह के ट्रिक्स अपना रहे हैं, उन्हीं में से एक है सीट डिवोर्स। चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं।
यात्रा अक्सर थका देने वाली होती है, खासकर तब जब आप काम, बच्चों की जिम्मेदारी और सफर की भागदौड़ को एक साथ संभाल रहे हों। ऐसी कई स्थितियां सामने आई हैं, जहां लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं। कई लोगों का कहना है कि पूरे दिन की थकान, बच्चे की देखभाल और नींद की कमी के बाद जब वे फ्लाइट में बैठते हैं, तो वे जानबूझकर अलग-अलग सीट चुनते हैं। इसका कारण यह है कि ऐसे समय में अक्सर उनका पार्टनर बातचीत शुरू कर देता है, जबकि उन्हें उस वक्त सिर्फ सुकून और थोड़े अकेले समय की जरूरत होती है। ऐसे में लोगों ने एक अलग तरीका अपनाया है, जिसे “सीट डिवोर्स” कहा जाता है। इसका मतलब है फ्लाइट में अलग-अलग सीट पर बैठना, ताकि दोनों अपने-अपने तरीके से आराम कर सकें और सफर को ज्यादा सहज बना सकें।
क्या होता है सीट डिवोर्स?
सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन आजकल कई कपल्स इसे एक समझदारी भरा विकल्प मान रहे हैं। यह रिश्ते में दूरी पैदा करने का नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने का तरीका है। अब कई लोग फ्लाइट में साथ बैठने के बजाय अलग-अलग सीट चुनते हैं। कोई विंडो सीट पर बैठकर आराम करता है, तो कोई आइल सीट पर फिल्म देखकर या सोकर समय बिताता है। उनका मानना है कि जब वे अपनी जरूरत के अनुसार समय बिताते हैं, तो सफर के बाद साथ बिताया समय और भी बेहतर हो जाता है।
बदलती सोच का संकेत
पहले यह माना जाता था कि साथ बैठना ही रिश्ते की मजबूती की निशानी है, लेकिन अब यह सोच बदल रही है। कई बार कपल्स सिर्फ दिखावे के लिए साथ बैठते हैं, जबकि पूरे सफर में वे अपने-अपने फोन में व्यस्त रहते हैं। “सीट डिवोर्स” इस दिखावे को खत्म करता है और असली कनेक्शन पर ध्यान देने का मौका देता है।
क्या हैं इसके फायदे?
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि दोनों अपनी पसंद की सीट चुन सकते हैं। किसी को भी बीच वाली सीट पर बैठने की मजबूरी नहीं होती, जो अक्सर सबसे असहज होती है। लंबे कद वाले लोगों के लिए यह और भी राहत भरा होता है। ठीक वैसे ही जैसे कुछ कपल्स बेहतर नींद के लिए अलग-अलग कमरे में सोना पसंद करते हैं, उसी तरह फ्लाइट में अलग बैठना भी रिश्ते को बेहतर बना सकता है।
थेरेपिस्ट की राय
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर समय साथ रहना ही अच्छे रिश्ते की पहचान नहीं होता। कई बार लगातार साथ रहने से बातचीत कम हो जाती है और हम एक-दूसरे को हल्के में लेने लगते हैं। इसके विपरीत, जब कपल्स थोड़ा स्पेस लेते हैं, तो दोबारा मिलने पर बातचीत ज्यादा गहरी और अर्थपूर्ण होती है।
Written By Toshi Shah
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