नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जंतर-मंतर प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह है, तो लोगों को वहां बैठकर अपनी बात रखने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही? खेड़ा ने आरोप लगाया कि मेट्रो स्टेशन बंद करने और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाने से सरकार डर का माहौल बना रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को करीब 2,500 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कारोबार प्रभावित हो सकता है, लेकिन व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोकना।

‘जंतर-मंतर तय जगह है, फिर लोगों को बैठने क्यों नहीं देते?’

पवन खेड़ा ने कहा कि यदि लोगों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने दिया जाए, तो उन्हें खान मार्केट, इंडिया गेट या अन्य जगहों पर जाकर बैठने की जरूरत क्यों पड़ेगी? उन्होंने सवाल किया कि जब विरोध दर्ज कराने के लिए एक निर्धारित स्थल मौजूद है, तो वहां प्रदर्शन की अनुमति देने में परेशानी क्या है?

खेड़ा ने कहा कि जंतर-मंतर संसद के करीब है और यही इसकी अहमियत है। उनके मुताबिक, संसद के नजदीक प्रदर्शन करने से लोग अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों तक अपनी समस्याएं और शिकायतें पहुंचा सकते हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार पर जनता से दूर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जंतर-मंतर का नाम सुनकर ही सरकार घबराने लगती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष वहीं जाकर अपनी आवाज उठाना चाहता है, क्योंकि यह संसद के पास स्थित है।

‘व्यापारियों के नुकसान की जिम्मेदारी सरकार की’

प्रदर्शनों से व्यापारियों को होने वाले नुकसान पर पवन खेड़ा ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कारोबार प्रभावित होना संभव है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से हो तथा पुलिस की बर्बरता न हो।

खेड़ा ने आरोप लगाया कि सेंट्रल पार्क बंद करने और 48 से 52 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने से आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि लोगों से लगातार घरों में रहने को कहना और मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियां लगाना भय का माहौल पैदा करता है।

कांग्रेस नेता के मुताबिक, यदि ग्राहक खान मार्केट और कनॉट प्लेस जैसे व्यावसायिक इलाकों तक नहीं पहुंच पाते, तो कारोबार प्रभावित होने की जिम्मेदारी प्रदर्शनकारियों पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने व्यापारियों को हुए कथित नुकसान के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी है विवाद

पवन खेड़ा के बयान ऐसे समय आए हैं, जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष तथा केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।

विपक्षी दल और INDIA गठबंधन से जुड़े नेता चुनाव आयोग की प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष के प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन से जुड़े बयानों पर सवाल उठाए गए हैं।

पवन खेड़ा ने सरकार पर विपक्ष के सवालों से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने परिसीमन जैसे संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की चुनौती भी दी और कहा कि विपक्ष इन मुद्दों पर बहस के लिए तैयार है।

‘लोकतंत्र में चुनाव के जरिए होता है सत्ता परिवर्तन’

सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर उठ रहे सवालों पर पवन खेड़ा ने कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के जरिए सरकार को सत्ता से हटाना ही है।

उनके बयान के बीच मुंबई के आजाद मैदान में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गिरफ्तार सह-कार्यकर्ताओं अशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन किया। वहीं, CJP ने दिल्ली के सेंट्रल पार्क में भी इसी तरह की रैली आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

यह भी पढ़ें: दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध के बाद, उत्तराखंड के पूर्व CM हरीश रावत के खिलाफ FIR दर्ज