नई दिल्ली : दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा मामले में गिरफ्तार हरि राम गुप्ता की जमानत याचिका बुधवार को खारिज कर दी। गुप्ता ने उम्र और स्वास्थ्य संबंधी आधार पर नियमित जमानत की मांग की थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) एसपीएस ललर ने आरोपी के वकील और लोक अभियोजक की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका पर फैसला सुनाया। अदालत ने जेल प्रशासन की ओर से दाखिल मेडिकल रिपोर्ट पर भी विचार किया।
मेडिकल आधार पर मांगी थी जमानत
आरोपी की ओर से अधिवक्ता यशपाल सिंह ने दलील दी कि हरि राम गुप्ता की उम्र करीब 81-82 वर्ष है और वह मधुमेह समेत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं। उन्होंने उम्र और मेडिकल स्थिति को देखते हुए नियमित जमानत देने की मांग की।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी किसी बीमारी का उल्लेख नहीं है, जिसका इलाज जेल की डिस्पेंसरी में नहीं किया जा सकता।
जांच शुरुआती चरण में, चार्जशीट अभी दाखिल नहीं
यह मामला 6 सितंबर को सत्या निकेतन में इमारत गिरने से जुड़ा है। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। एक घायल की हालत गंभीर बताई गई थी।
अदालत ने पहले भी कहा था कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि हरि राम गुप्ता उस इमारत की मालिक उर्मिला गुप्ता के पति हैं।
अदालत के अनुसार, परिसर के बिजली कनेक्शन गुप्ता के नाम पर हैं और अब तक जांच में जिन गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, उनमें कुछ ने मौके पर चल रहे काम में उनकी भूमिका का उल्लेख किया है।
पहले भी खारिज हो चुकी है जमानत याचिका
हरि राम गुप्ता की पिछली जमानत याचिका 18 सितंबर को खारिज की गई थी। उस समय अदालत ने कहा था कि हादसे की गंभीरता, सात लोगों की मौत, कई लोगों के घायल होने, जांच के शुरुआती चरण में होने और चार्जशीट दाखिल नहीं होने जैसे तथ्यों को देखते हुए इस स्तर पर नियमित जमानत देना उचित नहीं है।
अदालत ने हालांकि जेल अधीक्षक को निर्देश दिया था कि आरोपी को डॉक्टरों द्वारा निर्धारित सभी दवाएं बिना देरी उपलब्ध कराई जाएं।
अदालत ने यह भी कहा था कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी को घटनास्थल और वहां चल रहे काम से पूरी तरह अलग व्यक्ति नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष की यह दलील कि वहां केवल ग्राउंड फ्लोर को समतल करने का काम हो रहा था, निर्माण कार्य नहीं, जांच के दौरान और जरूरत पड़ने पर मुकदमे के दौरान जांच का विषय रहेगा।