Karnataka Drough: कर्नाटक में इस साल बारिश की कमी का असर अब खेती और ग्रामीण इलाकों पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने 240 में से 217 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इसी बीच केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम राज्य के हालात का जायजा लेने पहुंची है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अध्यक्षता में बेंगलुरु में हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी परमेश्वर ने केंद्रीय टीम के सामने राज्य की स्थिति रखी। उन्होंने टीम से अपील की कि प्रभावित इलाकों का जमीन पर जाकर निष्पक्ष और व्यापक आकलन किया जाए, ताकि केंद्र से मिलने वाली राहत जल्द जारी हो सके।

47 लाख हेक्टेयर में फसल का नुकसान

राज्य सरकार के मुताबिक, पहले दो चरणों में आकलन किए गए 177 तालुकों में करीब 47.09 लाख हेक्टेयर में फसल नुकसान सामने आया है। सरकार ने इसका अनुमानित आर्थिक नुकसान ₹46,324.50 करोड़ बताया है।कर्नाटक ने पहले 101 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए NDRF के तहत ₹3,705.30 करोड़ की सहायता मांगी थी।

अतिरिक्त ज्ञापन सौंपा गया

इसके बाद 76 अन्य तालुकों को लेकर 1 अक्टूबर को अतिरिक्त ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें ₹3,437.34 करोड़ की और सहायता की मांग की गई।इस तरह 177 तालुकों के लिए राज्य की कुल केंद्रीय सहायता मांग ₹7,142.64 करोड़ है।राज्य सरकार का कहना है कि बाकी 40 तालुकों में नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद प्रभावित फसल क्षेत्र करीब 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।

'जमीन पर हालात देखकर करें आकलन'

केंद्रीय टीम के सामने परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों को चिन्हित करने में केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों का पालन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी अतिरिक्त मदद की मांग नहीं कर रही, बल्कि जो सहायता नियमों के तहत राज्य को मिलनी चाहिए, उसका समय पर आकलन और भुगतान चाहती है।परमेश्वर के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और कृषि मंत्री को कई बार पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने केंद्रीय टीम से अपील की कि वह जमीनी स्थिति को देखकर राहत प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करे।ताजा रिपोर्टों के अनुसार, 217 तालुकों में से 177 का नुकसान आकलन पूरा हो चुका है, जबकि नए घोषित 40 तालुकों का आकलन जारी है।

35 फीसदी बारिश की कमी, पानी का संकट भी बढ़ा

कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से करीब 35 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। राज्य में इस मानसून करीब 551 मिमी बारिश हुई, जिसे 1956 के बाद सबसे कम आंकड़ों में से एक बताया गया है। बारिश की कमी का असर लगभग पूरे राज्य में देखने को मिला।सूखे का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की समस्या भी बढ़ रही है। सरकार के मुताबिक फिलहाल 861 गांवों में 227 टैंकरों और 720 किराए के बोरवेल के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है।

 

किसानों के लिए भी राहत की तैयारी

परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए ₹2,500 की तत्काल इनपुट सहायता की घोषणा की है। इसके अलावा चारा, पशुधन सुरक्षा, फसल सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार से जुड़े उपाय भी किए जा रहे हैं।इस साल कर्नाटक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब 37.50 लाख किसानों का नामांकन हुआ है। राज्य सरकार ने केंद्र से पात्र किसानों के फसल बीमा दावों का जल्द आकलन और भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।

सब्सिडी के मौजूदा मानकों में बदलाव

सरकार ने यह भी कहा है कि मौजूदा कृषि लागत और नुकसान को देखते हुए इनपुट सब्सिडी के मौजूदा मानकों में बदलाव किया जाना चाहिए। साथ ही सूखा प्रभावित किसानों के लिए पात्र ऋण पुनर्गठन और अन्य वित्तीय मदद RBI के नियमों के अनुसार उपलब्ध कराने की मांग की गई है।केंद्रीय टीम के जमीनी आकलन के बाद राज्य सरकार को उम्मीद है कि सूखे से प्रभावित किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राहत की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।