Jaishankar India Russia Relations: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत-रूस संबंधों को लेकर विदेश मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।जयशंकर ने बताया कि भारत-रूस संबंध केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय बैठक के केंद्र में रहे।
इसके साथ ही यूक्रेन संघर्ष को बातचीत और कूटनीति के जरिए खत्म करने की दिशा में भारत के प्रयासों पर भी सदस्यों को जानकारी दी गई।
7 सेक्टर से रूस को बढ़ेगा भारतीय निर्यात
बैठक में भारत और रूस के बीच व्यापार को ज्यादा संतुलित बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।सरकार के मुताबिक, ऑटोमोबाइल, फार्मा, खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, केमिकल्स और टेक्सटाइल जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।इसके अलावा भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी चर्चा हुई।
कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी हुई बातचीत
कनेक्टिविटी के मोर्चे पर चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और नॉर्दर्न सी रूट जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया।जयशंकर ने कहा कि भारत की प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है और सप्लाई के लिए कई स्रोत बनाए रखना देश की रणनीति का हिस्सा है।
रूस में जाएंगे 70 हजार भारतीय कामगार
बैठक में रूस जाने वाले भारतीय कामगारों से जुड़ा मुद्दा भी उठा। जयशंकर के मुताबिक, रूस ने इस साल करीब 70 हजार भारतीय कुशल कामगारों को लेने पर सहमति जताई है। इनमें निर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोग शामिल होंगे।सरकार ने रूस के अधिकारियों के साथ भारतीय नागरिकों से जुड़े मामलों को उठाया है। जयशंकर ने बताया कि अब तक करीब 140 भारतीय नागरिकों को वहां से डिस्चार्ज कराया जा चुका है।
रूसी सेना से जुडी बातचीत
वहीं, करीब 55 भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में होने की रिपोर्ट को लेकर भी भारत रूसी अधिकारियों के संपर्क में है और उनके बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है।भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां ऐसे एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, जो लोगों को गलत तरीके से रूस भेजने या रूसी सेना में भर्ती कराने के मामलों से जुड़े हैं। बैठक में भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने के गंभीर जोखिमों के बारे में भी जानकारी दी गई।
यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए भारत की पहल
बैठक के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की हालिया कूटनीतिक कोशिशों पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बिश्केक में मुलाकात हुई थी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि 'अनंत युद्ध' को अब युद्ध की समाप्ति की ओर बढ़ना चाहिए।पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की हाल में दिल्ली में भी मुलाकात हुई थी। वहीं जयशंकर ने पिछले महीने यूक्रेन की यात्रा की थी और न्यूयॉर्क में रूस तथा यूक्रेन के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की थी।
युद्ध खत्म कराने का कदम
जयशंकर के मुताबिक, भारत ने दोनों पक्षों से कहा है कि अगर युद्ध खत्म कराने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने में भारत किसी भी तरह मदद कर सकता है, तो वह इसके लिए तैयार है।बैठक में रूसी राष्ट्रपति पुतिन की Valdai Club में की गई टिप्पणी का भी उल्लेख हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के पास स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए 'बहुत अच्छे विचार' हैं। इसके साथ ही यूक्रेन के विदेश मंत्री की ओर से भारत के प्रयासों की सराहना किए जाने का भी जिक्र किया गया।