नई दिल्ली: तिरंगा फहराने के बाद गिरफ्तार किए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को तिहाड़ जेल में अलग-अलग सेल में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। उनकी सेल के बाहर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। साथ ही, उन्हें जेल के दूसरे कैदियों से अलग रखा गया है।

14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। पुलिस का आरोप है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद दोनों शांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, जेल में उनकी सुरक्षा को लेकर किए गए विशेष इंतजामों की चर्चा अब राजनीतिक हलकों में भी हो रही है।

अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किए गए CJP नेता
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल में आशुतोष रांका को कैदी नंबर 1784 और सौरव दास को 3752 आवंटित किया गया है। शुरुआत में दोनों को जेल नंबर-2 में रखा गया था, लेकिन बाद में रांका को जेल नंबर-4 में शिफ्ट कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों को जिन ब्लॉकों में रखा गया है, वहां कैदियों की संख्या दूसरे ब्लॉकों की तुलना में कम है। उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई है, ताकि दूसरे कैदियों से उनका संपर्क न हो सके।

आत्महत्या की आशंका के मद्देनजर निगरानी?
रिपोर्ट में तिहाड़ जेल के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दोनों नेताओं की सेल में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। उनकी 24 घंटे निगरानी की जा रही है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आत्महत्या जैसी किसी संभावित घटना को रोका जा सके। जेल प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। गुरुवार को CJP के संयोजक अभिजीत दिपके और पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह दोनों नेताओं से मिलने पहुंचे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, सौरव दास को जेल नंबर-2 में रखा गया है। इसी जेल में उमर खालिद भी बंद हैं और पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी रखा गया था। वहीं, आशुतोष रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है, जिसका इस्तेमाल पहले विपश्यना ध्यान के लिए किया जाता था। इस जेल में हथियार कारोबारी अभिषेक वर्मा को भी रखा जा चुका है।

तिरंगा मार्च के बाद शुरू हुआ विवाद
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया। इन गिरफ्तारियों और हिरासतों को लेकर विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन को युवाओं का इस्तेमाल कर अराजकता फैलाने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश के रूप में पेश किए जाने की बात सामने आई।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के बाद अभिजीत दिपके को जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया था। CJP के कार्यकर्ताओं ने कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में मार्च निकाला और इस दौरान 'जय हिंद' के नारे लगाए। प्रदर्शनकारी अलग-अलग स्थानों पर एकत्र हुए और कुछ ने राष्ट्रगान भी गाया।

मंडी हाउस में भी प्रदर्शन, चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी
इसी दौरान छात्रों और AISA तथा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सदस्यों ने मंडी हाउस में प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेना और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को वापस लेना शामिल था।

वामपंथी नेताओं, जिनमें सांसद जॉन ब्रिटास और संतोष कुमार भी शामिल थे, ने डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ मार्च में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झड़पें होने की भी खबर सामने आई। मौके पर मौजूद पत्रकारों और स्वतंत्र यूट्यूब रिपोर्टरों ने भी प्रदर्शन को कवर किया। इस दौरान कुछ स्वतंत्र पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और हूटिंग किए जाने की जानकारी सामने आई।

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