air chief marshal ap singh: भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को ड्रोन मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन बल के लिए क्रांतिकारी नहीं बल्कि विकासवादी हैं और उन्होंने एक अलग ड्रोन बल के गठन को लेकर इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि मानवरहित प्रणालियां और लोइटरिंग मुनिशन्स अन्य हथियारों और प्लेटफार्मों के साथ एकीकृत होने पर ज्यादा प्रभावी होंगे।

मौजूदा स्क्वाड्रन को बनाए रखने के लिए हमें हर साल 36 से 40 एयरक्राफ्ट की ज़रूरत है। हमें 42 से ज़्यादा स्क्वाड्रन की ज़रूरत है। हमें उम्मीद है कि हम तय टारगेट हासिल कर लेंगे। लड़ाकू विमानों के वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद को लकेर उन्होंने चिंता जताई है। उनकी डिलीवरी में लगातार देरी हो रही है, जिससे वायुसेना के बेड़े की संख्या घट रही है।

हथियारों को नहीं किया जा सकता अलग संचालन

वार्षिक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय वायु सेना के चीफ AP सिंह ने आज ड्रोन क्षमताओं को लेकर कई बाते कही। उन्होंने कहा की ड्रोन की क्षमताएं दशकों से चली आ रही हैं। इसकी संख्या और इनकी क्षमताओं का विस्तार किया जा रहा है। ड्रोन भारतीय वायु सेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं बल्कि विकास का हिस्सा है। हम ड्रोन लोइटरिंग मुनिशन्स की संख्या बढ़ा रहे हैं। मुझे ऐसा नहीं लगता कि हमें एक अलग ड्रोन बल की आवश्यक्ता है। हमे एक व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए और हमें एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। इन्हें हथियारों के साथ मिलकर इनके इस्तेमाल पर काम करना होगा।

अलग ड्रोन बल बनाने पर ज्यादा नहीं सोचा

दूसरे तरह के हथियारों को अलग से संचालित नहीं करा जा सकता है। इसलिए हमने अलग से ड्रोन बल बनाने के बारे में नहीं सोचा हैं। एपी सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय वायु सेना के पास पहले से ही ऐसी क्षमताओं से निपटने वाली इकाइयों की जरूरत और उनकी संख्या में इजाफे की तरफ ज्यादा है। उन्होंने कहा, "लॉइटरिंग गोला-बारूद ने हमें अराजकता पैदा करने और कुछ रक्षा संपत्तियों को नष्ट करने में मदद की," साथ ही उन्होंने इस बात को दोहराया कि ड्रोन और लॉइटरिंग गोला-बारूद दशकों से भारतीय वायु सेना की क्षमताओं का हिस्सा रहे हैं।

गोला-बारूद की संख्या में होगी वृद्धि

ड्रोन भारतीय वायु सेना के लिए क्रांतिकारी नहीं बल्कि विकास का विषय हैं। हम ड्रोनों की संख्या, लोइटर गोला-बारूद की संख्या और ड्रोनों के प्रकार और लोइटर गोला-बारूद की संख्या में वृद्धि कर रहे हैं। भारतीय वायु सेना प्रमुख की यह टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब आधुनिक सैन्य अभियानों में मानवरहित हवाई प्रणालियों और लोइटरिंग मुनिशन्स का तेजी से इस्तेमाल कर रही है।

उनका कहना है कि, सेना का दृष्टिकोण इन प्रणालियों को एक स्वतंत्र अंग के तौर पर संचालित करने के बजाय अन्य हथियारों के साथ एकीकृत करना है। सिंह ने भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की संख्या और चल रहे अधिग्रहण कार्यक्रमों पर भी बात की। उन्होंने इस बात को स्वीकार कर कहा कि सेना में विमानों की संख्या घट रही है।

भारतीय वायु सेना अन्य विकल्पों पर करेगा विचार

अधिकारी के मुताबिक भारतीय वायु सेना तेजस मार्क-1ए, मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) और भविष्य के मार्क-2 लड़ाकू विमान सहित अन्य प्लेटफार्म पर अपना काम बेहतरीन तरीके से कर रही है। सिंह ने यह भी कहा कि अगर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम में और देरी होती है, तो भारतीय वायु सेना को अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि रूस ने सु-57 की पेशकश की है ।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भारतीय वायु सेना प्रमुख ने कहा कि समय पर डिलीवरी और परिचालन क्षमता सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रमुख विमान कार्यक्रमों को "पूरे राष्ट्र के समग्र दृष्टिकोण" के माध्यम से आगे बढ़ाना आवश्यक है।

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