सितंबर 12-13 को भारत आएंगे व्लादिमीर पुतिन, नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

BRICS Summit in Delhi: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 से 13 सितंबर तक दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS Summit 2026 में भाग लेने भारत आएंगे। क्रेमलिन की ओर से इसकी पुष्टि की जा चुकी है। यह एक वर्ष के भीतर पुतिन का दूसरा भारत दौरा होगा।

10 घंटे पहले

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BRICS Summit in Delhi: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12 से 13 सितंबर तक दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS Summit 2026 में भाग लेने भारत आएंगे। क्रेमलिन की ओर से इसकी पुष्टि की जा चुकी है। यह एक वर्ष के भीतर पुतिन का दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले वे पिछले वर्ष दिसंबर में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए थे। हाल ही में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत पहुंचे थे। इन लगातार उच्चस्तरीय दौरों से स्पष्ट है कि बदलते वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक माहौल में भारत और रूस के संबंध अब भी मजबूत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

भारत का रूस से है पुराना नाता

भारत और रूस के रिश्ते कई दशकों पुराने हैं। शीत युद्ध के दौर से ही रूस भारत का विश्वसनीय सहयोगी रहा है। रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी सबसे अधिक मजबूत मानी जाती है। भारतीय सेना के कई प्रमुख हथियार और रक्षा प्रणालियां रूस से प्राप्त हुई हैं। S-400 Triumf मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना और परमाणु पनडुब्बी सहयोग जैसे उदाहरण दोनों देशों के गहरे रक्षा संबंधों को दर्शाते हैं। आज भी भारत अपने रक्षा उपकरणों और सैन्य तकनीक के बड़े हिस्से के लिए रूस पर निर्भर है।

भारत और रूस के रिश्ते क्यों है अहम?

ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी रूस भारत के लिए बेहद अहम बन चुका है। रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादकों में से एक है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बीच भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित किया। इससे भारत को आर्थिक लाभ भी मिला और ऊर्जा आपूर्ति भी स्थिर बनी रही। इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

संतुलनकारी साझेदार की भूमिका निभाता है भारत

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। भारत किसी एक वैश्विक शक्ति पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। ऐसे में रूस उसके लिए एक संतुलनकारी साझेदार की भूमिका निभाता है। संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों पर भी दोनों देश कई मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। कुल मिलाकर, बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच रूस भारत के लिए केवल एक पुराना मित्र नहीं, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और कूटनीतिक हितों का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बना हुआ है।

 

Written By: Geeta Sharma 

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