Azamgarh News: आजमगढ़ स्कूलों में अव्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठा रहे बच्चों के आंदोलन को अब किसान संगठनों का समर्थन मिल गया है। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने बच्चों की मांगों के समर्थन का ऐलान करते हुए स्कूलों की सोशल ऑडिट कराने की बात कही है। किसान नेताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों के बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव विरेंद्र यादव ने कहा कि स्कूलों में बदहाल व्यवस्था के खिलाफ बच्चों की आवाज जायज है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब गांव, कस्बे और मोहल्ले तक ले जाई जाएगी।
‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ की उठी मांग
किसान नेताओं ने कहा कि देश में वन नेशन, वन इलेक्शन और वन नेशन, वन टैक्स की चर्चा होती है, लेकिन समान शिक्षा व्यवस्था की बात क्यों नहीं होती। उन्होंने कहा कि किसान संगठन संसद के शीतकालीन सत्र में देश में एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए कानून की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को कॉमन स्कूल सिस्टम लागू करना चाहिए, ताकि अमीर और गरीब के बच्चों को समान शिक्षा और सुविधाएं मिल सकें।
बेरोजगारी और पेपर लीक पर भी सरकार को घेरा
किसान संगठनों ने कहा कि देश में बेरोजगारी, भर्ती में गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवा लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वहीं अब बच्चे भी अपने स्कूलों की बदहाली के खिलाफ सड़क पर उतर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक, स्कूल तक जाने के लिए अच्छी सड़क, पौष्टिक मिड डे मील और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। किसान नेताओं ने सरकार को चेताते हुए कहा कि अब बच्चे भी जवाबदेही मांगने के लिए आवाज उठा रहे हैं।
गांव के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का सवाल
किसान संगठनों का आरोप है कि आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण इलाकों के कई प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कहीं शिक्षक कम हैं तो कहीं बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच नहीं हैं। कई स्कूलों में पंखे, बिजली, साफ पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।
नेताओं ने कहा कि एक तरफ संपन्न परिवारों के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल मिल रहे हैं, वहीं ग्रामीण और मजदूर-किसान परिवारों के बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में उनसे समान स्तर पर प्रतियोगिता की उम्मीद करना अन्याय है।
‘स्कूलों की होगी सोशल ऑडिट’
सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने कहा कि स्कूलों की जमीनी हकीकत जानने के लिए सोशल ऑडिट की जाएगी। संगठन गांव-गांव जाकर स्कूलों में शिक्षकों, भवन, बिजली, पंखे, शौचालय, पेयजल और मिड डे मील समेत अन्य सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने की बात कह रहे हैं। किसान नेताओं ने साफ कहा कि बच्चों की शिक्षा का सवाल अब सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे गांव-गांव का आंदोलन बनाया जाएगा।
Written by: Shailesh Yadav