Delhi Protest News: 20 जुलाई को दिल्ली में हुए ‘चलो संसद’ मार्च को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान घायल हुए कुछ लोगों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। कई प्रदर्शनकारियों ने पैलेट जैसे धातु के छर्रे लगने की शिकायत की थी और कुछ मामलों में सर्जरी के दौरान शरीर से ऐसे धातु के टुकड़े निकाले भी गए।
इन घायलों में कुछ का इलाज अब भी चल रहा है। वहीं, कुछ पीड़ितों का कहना है कि घटना के बाद उन्हें CJP की ओर से नियमित तौर पर कोई संपर्क या हालचाल नहीं मिला। हालांकि, पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और प्रदर्शनकारियों के दावों में अंतर है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है, जबकि कुछ घायलों और उनकी ओर से दायर याचिका में पैलेट से चोट लगने का दावा किया गया है।
आंख की सर्जरी के बाद भी साहिल को नहीं लौटी रोशनी
दिल्ली के नजफगढ़ निवासी छात्र साहिल लोचव उन प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं, जिन्हें 20 जुलाई की घटना के दौरान आंख और शरीर के दूसरे हिस्सों में चोट लगी थी।परिजनों के मुताबिक, उनकी दायीं आंख में गंभीर चोट आई थी और आंख की सर्जरी भी कराई गई। बाद में दोबारा ऑपरेशन कर लेंस डाला गया, लेकिन अब तक आंख की रोशनी वापस नहीं आई है।परिवार का कहना है कि शरीर में लगे सभी छर्रे अभी नहीं निकाले जा सके हैं। इस चोट का असर उनकी पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ा है।
इरशाद के शरीर से निकाले गए धातु के टुकड़े
जबलपुर के रहने वाले शेख इरशाद मंसूरी भी 20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल हुए थे। उनकी चोटों के बाद लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में सर्जरी की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके चेहरे और गर्दन समेत शरीर के कई हिस्सों से धातु के टुकड़े निकाले गए। मेडिको-लीगल रिपोर्ट में उनके शरीर से कई metallic foreign bodies निकाले जाने का उल्लेख सामने आया था। इरशाद ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें पैलेट जैसी चीजों से चोट लगी। वहीं पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे को खारिज किया है। इस मामले में अलग-अलग एजेंसियों की भूमिका और इस्तेमाल किए गए बल को लेकर सवाल उठे हैं।
प्रशांत के शरीर में भी रह गए कुछ छर्रे
बिहार के रहने वाले प्रशांत कुमार सिंह भी प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। उनके हाथ, छाती और कमर के आसपास चोट लगने की बात सामने आई थी।
इलाज के दौरान कुछ धातु के टुकड़े निकाले गए, जबकि छोटे टुकड़ों को लेकर डॉक्टरों ने कथित तौर पर जोखिम को देखते हुए उन्हें शरीर में ही छोड़ने का फैसला किया।प्रशांत ने भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनके और इरशाद मंसूरी के अलावा पूर्व IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद की ओर से दायर याचिका में प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में घायलों के इलाज, मुआवजे और पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद पैलेट गन के कथित इस्तेमाल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। याचिकाकर्ताओं ने नागरिक प्रदर्शनों में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने और घायल लोगों के लिए इलाज एवं मुआवजे की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए घायल याचिकाकर्ताओं और समान स्थिति वाले लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने भीड़ नियंत्रण में बल प्रयोग के लिए परिस्थितियों के मुताबिक graded response की जरूरत पर टिप्पणी की थी।
CJP से संपर्क नहीं होने का दावा
घायल प्रदर्शनकारियों और उनके परिवारों में एक और नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका दावा है कि शुरुआती दिनों के बाद CJP की ओर से उनसे संपर्क नहीं किया गया।कुछ परिवारों का कहना है कि चोटों और इलाज के बीच उन्हें संगठन से नियमित मदद या हालचाल की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आखिर 20 जुलाई को हुआ क्या था?
20 जुलाई को CJP के आह्वान पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर ‘चलो संसद’ मार्च के लिए दिल्ली में जुटे थे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान बैरिकेडिंग के पास
बाद में पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया। CRPF की एक आंतरिक जांच से जुड़ी रिपोर्टों में RAF कर्मी द्वारा पैलेट गन के सात राउंड चलाए जाने की बात सामने आई, जबकि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने से इनकार किया।
Written By: Shivashakti Narayan Singh